नई दिल्ली, 27 अप्रैल (ता)। नेपाल की नई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चीन के साथ हुए कई पुराने समझौतों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, स्पष्ट किया है कि इन परियोजनाओं की समीक्षा पूरी होने तक बीजिंग के साथ कोई नया समझौता नहीं किया जाएगा।
चीन के बारे में एक धारणा है कि वह भौगोलिक रूप से छोटे देशों के साथ अक्सर अपने आर्थिक संबंधों का इस्तेमाल वहां राजनीतिक दखल बढ़ाने और सामरिक हित साधने के लिए करता है। नेपाल और चीन संबंधों में यह प्रवृत्ति पिछले वर्षों में अधिक स्पष्ट हुई है। नेपाल में चीन की भूमिका अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट रिसर्च एंड रिजोल्यूशन (आईसीआरआर) के अनुसार, बीजिंग अब नेपाल के आंतरिक निर्णयों और रणनीतिक मामलों में भी हस्तक्षेप कर रहा है। तिब्बत और ताइवान जैसे मुद्दों पर भी नेपाल पर राजनयिक दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है। केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में चीन के साथ कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। उस समय इन प्रोजेक्ट्स को नेपाल की आर्थिक प्रगति के लिए ऐतिहासिक कदम बताया गया था लेकिन बाद में इन्हें स्पष्ट कारण के बिना ही रोक दिया गया। बालेन शाह के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार अब इस बात की जांच कर रही है कि ओली के समय की ये परियोजनाएं आखिर अचानक क्यों रुक गईं या इनमें देरी क्यों हुई। माना जा रहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में कोई भी विदेशी निवेश नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ न जाए।
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