ग्रेटर नोएडा 01 जुलाई। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्रा की अदालत ने वर्ष 2021 में बादलपुर क्षेत्र के गिरधरपुर सुनारसी गांव में जमीन विवाद में हुए दोहरे हत्याकांड में फैसला सुनाया। अदालत ने पांच सगे भाइयों समेत नौ दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा समेत अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 86-86 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
जुर्माना न देने पर एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले के बाद मृतकों के स्वजन ने राहत की सांस ली और अदालत परिसर में माहौल भावुक हो गया।
एडीजीसी अपराध धर्मेंद्र जयंत के मुताबिक, हत्याकांड आठ फरवरी 2021 को हुआ था। गांव में एक जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसे सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई थी।
पंचायत शुरू होते ही आरोपित पक्ष ने गाली-गलौज कर दी और जान से मारने की नीयत से लाइसेंसी व अन्य हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां लगने से सुरेश उर्फ सलेक, अमित पुत्र गजेंद्र और प्रेम पुत्र खजान गंभीर रूप से घायल हो गए।
तीनों को यशोदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अमित को मृत घोषित कर दिया। सुरेश उर्फ सलेक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रेम सिंह का लंबे समय तक उपचार चला।
घटना के अगले दिन वादी सुनील की तहरीर पर बादलपुर कोतवाली में देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र पुत्र हरिया, भोपाल, महिपाल उर्फ अल्लू पुत्र जयपाल, अमरजीत बंसल और अमित बंसल के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, गाली-गलौज, क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अमित बंसल को धारा 319 सीआरपीसी के तहत तलब कर मामले में शामिल किया।
सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र, भोपाल, महिपाल उर्फ अल्लू, अमरजीत बंसल और अमित बंसल को दोषी करार दिया। सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सामूहिक रूप से की गई फायरिंग में दो लोगों की मौत और एक का गंभीर रूप से घायल होना अत्यंत जघन्य अपराध है।
दंड निर्धारण में अपराध की प्रकृति, गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी आधार पर आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई। फैसला सुनाते समय पांच दोषी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से और 4 व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद थे।
सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने नरमी की अपील की। कहा कि देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र और जितेन्द्र सगे भाई हैं। पिता का निधन हो चुका है और परिवार की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। महिपाल अविवाहित है, जबकि भोपाल और बंसल बंधुओं के छोटे-छोटे बच्चे हैं। किसी का आपराधिक इतिहास नहीं है और मामला ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का नहीं है। लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता देखते हुए सभी तर्क खारिज कर दिए।

