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    Home»देश»12वीं बोर्ड में निकिता ने हासिल किए 93.88% अंक, पर नतीजों से 10 दिन पहले ही थम गईं सांसें
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    12वीं बोर्ड में निकिता ने हासिल किए 93.88% अंक, पर नतीजों से 10 दिन पहले ही थम गईं सांसें

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comApril 1, 2026No Comments12 Views
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    श्रीगंगानगर 01 अप्रैल। राजस्थान बोर्ड के 10वीं और 12वीं के नतीजे आते ही प्रदेश भर के लाखों घरों में खुशियां मनाई जा रही हैं और छात्र अपनी सफलता का जश्न मना रहे हैं. लेकिन श्रीगंगानगर जिले के रावला तहसील में एक घर ऐसा भी है जहां सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है क्योंकि वहां की होनहार बेटी निकिता अब अपनी इस बड़ी कामयाबी को देखने के लिए इस दुनिया में नहीं है. निकिता ने 12वीं की परीक्षा में 93.88 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. रावला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की इस छात्रा ने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया उसे देखने के लिए वह खुद मौजूद नहीं रह सकी.

    निकिता की यह सफलता इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि वह लंबे समय से हेपेटाइटिस और डायबिटीज जैसी दो गंभीर बीमारियों से एक साथ जंग लड़ रही थी. शारीरिक तकलीफों के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई से कभी नाता नहीं तोड़ा और बोर्ड परीक्षाओं में जी-जान लगाकर तैयारी की ताकि वह अपने परिवार का नाम रोशन कर सके. निकिता के माता और पिता दोनों ही दिहाड़ी मजदूरी करके घर चलाते हैं और अपनी बेटी के सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे थे. लेकिन 20 मार्च को निकिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और रिजल्ट आने से ठीक 10 दिन पहले ही उसने अपनी अंतिम सांस ली.

    अगर आज निकिता जीवित होती तो 31 मार्च को आए इन शानदार नतीजों को देखकर उसके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहता. निकिता की योजना आगे एक अच्छे कॉलेज में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की थी ताकि वह पढ़-लिखकर अपने गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार सके. उसकी मौत ने न केवल एक होनहार छात्रा को छीना है बल्कि एक मजदूर परिवार की उन उम्मीदों को भी तोड़ दिया है जो अपनी बेटी के सहारे बेहतर कल की तलाश में थे. स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों के लिए भी यह पल बेहद भावुक है क्योंकि वे निकिता को एक जुझारू और मेधावी छात्रा के रूप में याद कर रहे हैं.

    इस साल राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षाओं के लिए करीब 8.5 लाख छात्रों ने अपना पंजीकरण कराया था जिसमें से 8.2 लाख बच्चे परीक्षा में शामिल हुए थे. सबसे अधिक संख्या आर्ट्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों की थी जहाँ लगभग 6 लाख बच्चों ने अपनी किस्मत आजमाई जबकि साइंस और कॉमर्स में भी बड़ी तादाद में छात्र बैठे थे. निकिता जैसे हजारों बच्चों ने कठिन परिस्थितियों में मेहनत की लेकिन उसकी कहानी सबसे अलग और दर्दनाक साबित हुई.

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