कुछ देशों में चल रहे युद्ध के लगभग तीन सप्ताह हो रहे हैं। जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। जल्द से जल्द इस युद्ध का समाधान के लिए सभी पक्षों से भारत आग्रह भी कर रहा है। भारत के सामने भी चुनौती खड़ी हैं। आर्थिक और मानवीय कुछ मुददे ऐसे हैं जो बहुत गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बीते सोमवार को लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा कि इस संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है। इसका सामना कोरोना संकट की तरह करना होगा। ध्यान से सोचें तो जो स्थिति कुछ देशों में पिछले कई सालों से चल रही है उसे ध्यान में रखते हुए हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। पीएम साहब हर कठिन घड़ी में पूरा देश आपके साथ है। यह भी पक्का है जिस प्रकार पहले समस्याओं का सामना करने के लिए विपक्ष ने सरकार को सहयोग दिया। इसलिए सरकार जो निर्णय ले वो देशहित में होगा।
लेकिन पश्चिमी एशिया के चिंताजनक हालातों से निपटने के लिए जो भी उचित हो वो किया जाए लेकिन कोरोना संकट की तरह कर्फ्यू ना लगाया जाए। क्योंकि आम आदमी रसोई गैस और तेल की समस्या निपटा सकता है इसलिए कोई भी संकट हो सब उसके समाधान के लिए तैयार हैं। मगर पीएम साहब कोरोना जैसा कर्फ्यू मत लगाईये क्योंकि अभी देशवासी कोरोना में हुई पुलिस की ज्यादतियां नहीं भूला पाए हैं फिर अभी उनकी उस दौरान बिगड़ी आर्थिक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। मगर देश की एकता और सुख दुख में साथ रहने की परंपरा सभी निभाएंगे मगर जो पुलिस की ज्यादतियां नियमों को लेकर उस समय हुई उसने नागरिकों को हिलाकर रख दिया था इसलिए पीएम साहब कोरोना जैसा कर्फ्यू ना लगाए। तेल की बचत गैस की परेशानी और अन्य समस्याएं सब मिलकर झेल लेंगे मगर पुलिस द्वारा की गई उस समय ज्यादतियों को याद कर रूह कांपने लगती है। तब जो देखा कि कोई कहीं जा रहा हो या कोई घर में भी हो तो पुलिस द्वारा उसे बेइज्जत करना और उठाकर बंद कर देना आम बात हो गई थी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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