बच्चों को बीमारियों से बचाने और उनकी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए दवा कंपनियां नए टीके विकसित कर रही है और सरकार बच्चों को लगवाने के लिए प्रयास कर रही है तो देशभर में डॉक्टर हजारों की फीस लेकर बच्चों को सुरक्षित रखने की बात कहकर ऐसे टीकेलगा रहेहैं। उसके बावजूद यह पढ़ने को मिलना कि उमस और भीषण गर्मी से गश खाकर गिर रहे हैं स्कूलों में बच्चे। खबर के अनुसार प्राथमिक विद्यालय खजूरी और परीक्षितगढ़ प्राथमिक विद्यालय के दो मामलों को उजागर किया गया है। इसमें बच्चों को दवा पानी पिलाकर खुले में बैठाया जा रहा है। बीएसए आशा चौधरी का कहना है कि भीषण गर्मी के चलते बच्चों को स्कूलों में सुरक्षित स्थानों पर बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। वर्ष में बारिश ठंड और गर्मी व उमस का मौसम आना नई बात नहीं है। लेकिन उससे परेशान होकर बच्चे गश खाकर गिर रहे हैं तो इसके लिए स्कूल प्रशासन और प्रबंधसमिति दोषी है। बच्चों को ऐसे स्थान पर बैठाया जा रहा है जहां ताजी हवा उपलब्ध नहीं होती। इस बारे में बीएसए ने आदेश भी दिए हैं। अब तो स्कूलों में अच्छा माहौल होता है और पहले तो गर्मी व ठंड में जानकारों के अनुसार पढ़ाई कराई जाती थी तो अब ऐसा क्यों हो रहा है जबकि छात्रों को पोष्टिक आहार की व्यवस्था भी सरकार कर रही है। ऐसे में उनकी इम्यूनिटी बढ़नी चाहिए कम क्यों हो रही है इस पर भी जिम्मेदारों को ध्यान देना होगा कि हमारे नौनिहाल कमजोर क्यों हो रहे हैं। बीएसए समेत शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण औचक करना चाहिए जिससे प्रबंध समितियों और स्कूल संचालकों पर दबाव बना रहे। और वो व्यवस्थाओं पर ध्यान दें।
गांव की बात छोड़ तो शहरों में ऐसे स्कूल चल रहे हेैं जिनमें शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकार लाखों रुपये दे रही है लेकिन बच्चों के नाम पर स्कूल में २५ या ५० बच्चे हैं। कहीं तो सिर्फ नाम चढ़ा दिए गए हैं। जरुरत पड़ने पर बच्चों को घर से लायाजाताहै। बच्चे इसलिए नहीं आते जहां ताजी हवा जाने का रास्ता नहीं है। कावकनुमा मकानों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इन स्कूलों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अब उमस व गर्मी के नाम पर समय बदलने या अवकाश की मांग हो रही है लेकिन यह कोई समस्या का समाधान नहीं है। जानकारों के अनुसार साल में आधे दिन तो वैसे ही छुटिटयां होती हैं। बाकी दिन भी पढ़ाई ना हो तो देश का भावी भविष्य कैसे मजबूत बनेंगे। मेरा मानना है कि स्कूलों में सुविधा बढ़ानी चािहए। मानक पर ना उतरने वाले स्कूलों को बंद किया जाए और उनके बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरण किया जाए। साथ ही शिक्षकों व प्रबंध समिति पर कार्रवाई हो क्योंकि जब जौहर विवि के छात्रों को गुरु जंभेश्वर विवि में भेजा जा सकता है तो इन बच्चों को अच्छे स्कूलों में क्यों नहीं भेजा जाता। सरकार को चाहिए कि नियमों के उल्लंघन कर चलने वाले स्कूल संचालकों को बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के लिए जेल भेजा जाए क्योंकि यह अभिभावक और सरकार के साथ धोखा और बच्चों का मानसिक उत्पीड़न के दोषी कहे जा सकते हेैं प्रधानाचार्या व प्रबंध समिति के अध्यक्ष।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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