लगभग दो दशक पूर्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी वृंदावन जाने का मौका मिला क्योंकि बचपन में कई बार अपनी मां के साथ वहां गया तो अच्छी यादें जुड़ी थी और यमुना से विशेष लगाव और सम्मान गाड़ी से उतरकर बांके बिहारी मंदिर के दर्शन कर यमुना विहार के लिए गया तो नाव में सवार हुए और कुछ दूर चलने पर सामने से एक पाइप से यमुना में गिर रही गंदगी को देखकर बाहर निकल आया। वो याद हमेशा बनी रहती है लेकिन जब श्री नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला और स्वच्छता अभियान की घोषणा की और नदियों को साफ करने के लिए शायद अब तक अरबो रुपये साफ हो चुके हैं लेकिन पिछले कुछ दशक से जनपद मुजफ्फरनगर के शुक्रताल तीर्थ जिसकी बड़ी मान्यता है के बारे में यह पढ़कर आश्चर्य हुआ कि गंगा में आए कैमिकल युक्त पानी को लेकर साधु संतों के द्वारा प्रदर्शन किया गया। इनका कहना था कि गंगा को स्वच्छ रखने के दावे धरातल पर धराशायी नजर आते हैं। गंगा के स्वच्छ होने कीबात तो दूर उलटे फैक्ट्रियों का रासायनिक पानी नदियों में गिरने से जीव जंतु मर रहे हैं और शुक्रताल समेत तमाम श्रद्धालुओं में रोष है और उन्होंने गंगा में स्नान करना बंद कर दिया है। इस सूचना पर एसडीएम जानसठ रश्मि लांबा के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीरपाल निर्वाल गंगा सेवा समिति के महामंत्री डॉ महकार सिंह रामकुमार शर्मा अरुण पाल पहुंचे। एसडीएम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता व फील्ड अटेंडेंट आलम सैफी के साथ मौके का मुआयना कर सैंपल लिया। कहा जा रहा है कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रुड़की व हरिद्वार को अवगत कराया जा चुका है। दोनों राज्यों की टीम निरीक्षण कर रही है। दूसरी ओर इस पवित्र तीर्थ की गलियों में गंदे पानी के तालाब बन जाने से परेशान नागरिकों और संतों ने पूर्णागिरी आश्रम के महंत महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि इस समस्या पर शासन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। आश्रम के सामने की सड़क तालाब बन गई है। मजबूरी में सड़कों पर उतरना पड़ा है। मानव चेतना केंद्र के सामने भी जलभरा होने से भक्तों का आना कम हो रहा है और पर्यटकों व श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। इससे संबंध खबर पढ़कर अहसास हुआ कि २० साल पहले जो स्थिति यमुना में देखी थी उससे देखकर लगताहै कि वहां भी ऐसी ही स्थिति हो सकती है। सवाल उठताहै कि पीएम मोदी नदियों की सफाई के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उसके बावजूद ऐसी स्थिति क्यों है कि स्वामी कल्याण देव की धरती शुक्रताल में गंगा में कैमिकल वाला पानी आने से जानवर मर रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया गया और पीएम की भावनासे जुड़े इस अभियान के प्रति लापरवाही क्यों बरती जा रही है जिससे यहां आने वाले लोगों और साधु संतों की भावनाएं आहत हो रही हैं। हैरानी इस बात की है कि मुजफ्फरनगर का हिस्सा रहे शामली में मुख्यमंत्री करोड़ों की योजनाएं घोषित कर रहे थे और मुजफ्फरनगर में साधु संत व प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदेश सरकार की अच्छी छवि को विवादित बनाने वाले ऐसे कारणों से संबंध अधिकारियों ने पहले ऐसी समस्याओं के समाधान के प्रयास क्यों नहीं किए। मेरा मानना है कि सरकार की छवि को धूमिल करने के प्रयास से संबंधित अफसरों के खिलाफ गंगा को स्वच्छ बनाने और लोगों की भावनाओं को आहत ना होने देने के लिए कार्रवाई की जाए। नागरिकों की यह बात सही है कि औद्योगिक इकाईयां नहीं लगने देने चाहिए थी और लगी है तो उनके विषैले पानी की निकासी कहीं ओर की जाए। गंगा में ना डलने दिया जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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