जातिवाद, अमीर गरीब की व्यवस्था को समाप्त कर देश में सर्वधर्म सदभाव के समान गरीब हो या अमीर सब एक समान की भावना को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और संघ संचालक मोहन भागवत ने अपने अन्य सहयोगियों के माध्यम से बीते वर्ष में जो हिंदुओं को एक सूत्र में पिरोने और अन्य धर्मों के लोगों को संघ को समझने का मौका देने हेतु जो अभियान चलाया था भले ही उसके कोई बहुत बड़े परिणाम निकलकर ना सामने आए हो लेकिन एक बात कही जा सकती है कि सभी समाज और जातियों के लोग अब ऐसे आयोजन करने लगे हैं जिसमें सब एक छत के नीचे बैठकर देश और समाज व परिवारों की प्रगृति के लिए चर्चा करने लगे हैं। ध्यान से सोचें तो यह संघ परिवार के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब मोहन भागवत का कथन देश में अलगाव और नहीं चाहिए। अपने आप के साथ में सबको एक साथ जोड़े रखने का संदेश दे रहा है। बताते चलें कि बीते बुधवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर एम्स में युवा संवाद कार्यक्रम में मोहन भागवत द्वारा सोनपेरी तथा अन्य स्थानों से आए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब सिर्फ चर्चा से काम नहीं चलेगा समाधान भी खोजने होंगे। सामाजिक समरसता हमारी ताकत है इसलिए हमें एक दूसरे के घरों में आना जाना चाहिए। मोहन भागवत ने सभी से अपील की कि अपने मन से अलगाव और भेदभाव को समाप्त करें। सभी हिंदू एक हैं। सभी मंदिर जलस्त्रोत एवं शमशान सभी के लिए खुले रहने चाहिए किसी का भी मूल्यांकन जाति संपत्ति या भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तक ऐसे विकास मॉडल नहीं बना सकती है जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो सके। अब विकास और प्रकृति का टकराव नहीं समान रास्ते पर चल सके। मोहन भागवत की भावनाएं स्पष्ट करती हैं कि देश के विकास एकता और परिवारों की खुशहाली व मजबूत समाज के लिए सबको एक होकर चलना होगा।
एक खबर के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 साल हो गए हैं। अब संघ अपने सांगठनिक ढांचे में बदलाव पर विचार कर रहा है। संघ में इस तरह के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। मौखिक चर्चा के अनुसार मार्च 2026 में होने वाली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बदलाव के प्रस्ताव पर बात होगी और प्रतिनिधि सभा में ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। ये प्रतिनिधि सभा हरियाणा के समालखा में होना बताया जा रहा है।
ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव
सांगठनिक ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव है। अभी संघ ने पूरे देश को काम के लिहाज से 11 क्षेत्रों में बांटा है लेकिन इसे 11 से 9 करने का प्रस्ताव है। अभी संघ के प्रांत प्रचारक राज्य की सरकारी परिभाषा के हिसाब से बने प्रांत के आधार पर नहीं होते हैं, ये भी संघ के कामकाज की सुविधा के हिसाब से बनाए गए हैं। लेकिन अब प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव है।
प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव
बताते हैं कि ये राज्य की इकाई के हिसाब से ही होंगे। जैसे अभी संघ के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों में तो एक ही प्रांत प्रचारक हैं जो एक तरह से पूरे राज्य के ही प्रचारक हैं। लेकिन जो बड़े राज्य हैं उनमें एक राज्य में ही कई प्रांत प्रचारक हैं। जैसे राजस्थान में 3 प्रांत प्रचारक, यूपी में 6 प्रांत प्रचारक हैं। बदलाव के बाद सभी राज्यों में राज्य प्रचारक होंगे और पूरे यूपी में भी एक राज्य प्रचारक। अभी बड़े राज्यों में कामकाज के हिसाब से ज्यादा प्रांत प्रचारक बनाए गए हैं। जब राज्य प्रचारक हो जाएंगे तो साथ ही संभाग प्रचारक का पद भी बनाया जाएगा, ये एक संभाग यानी कमिश्नरी के प्रचारक होंगे। ये विभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक के बीच की इकाई होंगे।
संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि संघ के काम का विस्तार हो रहा है और उसी हिसाब से संगठन का ढांचा बनाने का प्रस्ताव है। इससे काम का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज जागरण सहित पंच परिवर्तन का जो काम तय किया है उसे ठीक से संचालित करने के लिए संगठन के ढांचे में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। अनाधिकृत सूत्रों के अनुसार अक्टूबर 2026 तक संघ के शताब्दी वर्ष के ही कई कार्यक्रम है इसलिए अगर बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तब भी ये साल 2027 तक ही लागू हो पाएगा। अगर बात यूपी की करें तो यहां के १८ मंडलों में नई व्यवस्था के तहत नो संभाग बनाएं जाएंगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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