देहरादून 13 मार्च। उत्तराखंड सरकार ने आगामी चारधाम यात्रा को लेकर बड़ा फैसला करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की जाएगी और किसी भी श्रद्धालु को यात्रा से नहीं रोका जाएगा. संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह जानकारी देते हुए बताया कि चारधाम यात्रा के लिए अब तक 4 लाख 44 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवा लिया है और यह पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क है.
संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है. वर्ष 2001 में जहां करीब 10 लाख श्रद्धालु यात्रा पर आते थे वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 51 लाख तक पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि पंजीकरण व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की संख्या पर रोक लगाना नहीं बल्कि यात्रा को व्यवस्थित बनाना है. इससे किसी भी आपात या दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की जानकारी आसानी से मिल सकती है.
विधानसभा में नियम 58 के तहत बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने यात्रा पड़ावों पर भारी जाम का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि कई बार श्रद्धालुओं को पांच से छह घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है. उन्होंने वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की मांग की. बुटोला ने ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था का भी सुझाव दिया ताकि ऑनलाइन पंजीकरण में दिक्कत होने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिल सके. इसके साथ ही यात्रा को 24 घंटे खुला रखने की बजाय सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक सीमित करने का सुझाव भी दिया.
प्रताप नगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी सदन में चारधाम यात्रा से जुड़े मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि यात्रियों की संख्या निर्धारित नहीं की जानी चाहिए क्योंकि यह आस्था से जुड़ा विषय है और लाखों लोग हर साल भगवान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि 31 मार्च तक यात्रा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी. पेयजल व्यवस्था के लिए जल संस्थान को जिम्मेदारी दी गई है जबकि सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ को निर्देश दिए गए हैं. यात्रा मार्गों पर स्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन को लेकर भी गंभीरता से काम किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके.

