सोनभद्र, 13 फरवरी। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने अपगी सगी बेटी के साथ दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने वाले पिता को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। गत दिवस सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए दोषी पिता को शेष जीवन काल तक कारावास में रखने का आदेश दिया। उस पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
जिले का यह पहला मामला है, जिसमें अदालत ने आरोप तय होने के बाद महज 35 दिन में सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है। इससे पहले पिछले वर्ष पाक्सो एक्ट के ही मामले में 54 दिन में सुनवाई पूरी की गई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता के मामा ने 27 अक्तूबर 2025 को चोपन थाने में तहरीर दी थी। अवगत कराया था कि मार्च 2025 में उसके बहन की मौत हो चुकी है। उसकी भांजी (15) और उसके दो भाई चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता के साथ रहते हैं। सगे पिता ने अप्रैल 2025 को भांजी के साथ दुष्कर्म किया।
सोनभद्र में करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व 8 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी देवशाह को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जो उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक रहेगी। उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड की धनराशि में से 80 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। यह मामला चोपन थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 13 जून 2022 को चोपन थाने में तहरीर दी थी। इसमें बताया गया था कि 12 जून 2022 की शाम 4 बजे उनकी 8 वर्षीय बेटी खेलने गई थी। वहां देवशाह पुत्र लालता प्रसाद, निवासी कैम्हापान पनारी, थाना चोपन, जिला सोनभद्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
देवशाह ने बच्ची को धमकी दी थी कि वह घर पर बताए कि उसे कुत्ते ने काट लिया है। जब बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टर ने कुत्ते के काटने से इनकार किया और पहले एफआईआर दर्ज कराने को कहा। इस तहरीर पर चोपन पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुना, 8 गवाहों के बयान दर्ज किए और पत्रावली का अवलोकन किया।
अदालत ने देवशाह (30) वर्ष को पॉक्सो एक्ट में दोषी पाया और उसे कठोर उम्रकैद तथा एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने पैरवी की।
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