लखनऊ अम्बेडकर नगर और मेरठ कचहरी में बुधवार को दिन में एक बजकर १० मिनट पर तेरह धमाकों के होने की मिली सूचना ने प्रशासन और पुलिस के साथ साथ नागरिकों को भी हिलाकर रख दिया क्योंकि कचहरी चाहे मेरठ की हो या लखनऊ की या अम्बेडकर नगर की अनेकों लोग यहां प्रतिदिन अपने कार्यों से संबंध में आते हैं उक्त सूचना मिलते ही सभी जगह के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी यह अफसरों की जागरूकता का परिणाम रहा या सौरभ विश्वास नाम की ईमेल आई डी से उच्च न्यायालय इलाहाबाद के ईमेल एकाउंट से यह ईमेल बीते बुधवार तड़के २रू१३ बजे भेजने वाले ने झूठी खबर भेज अफरा तफरी मचाने की कोशिश की जो भी हो इससे पहले भी वर्ष २०२६ मेें १३ फरवरी को उत्तर प्रदेश के कई जिलों मेरठ सहित कचहरी को ईमेल के जरिये बम से उड़ाने की धमकी दी गयी। १६ फरवरी को फिर धमकी दी गयी और अब १ अप्रैल को वही घटनाक्रम दोहराया गया।
भगवान की कृपा और अफसरों की जागरूकता से यह प्रयास टला या ईमेल भेजने वाले ने बदअमनी फैलाई जो भी हो यह ऐसे प्रकरण है जो गम्भीर है और इन्हें टाला नहीं जाना चाहिए और यह सोचकर कि कुछ नहीं हुआ हमें चुप नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि कभी स्कूलों को कभी कचहरी तो कभी ओर कोई सावर्जनिक स्थानों पर ऐसी धमकियां दी जाती है मगर कुछ होता नहीं मगर पिछले कुछ वर्षों में जो ऐसे धमाके हुए उन्हें दृष्टिगत रख जनहित में यह पता लगाया और कोई ऐसी व्यवस्था विकसित करने की बड़ी जरूरत है कि जिससे यह पता चल जाये कि उक्त ऐसी ईमेल किसने और कहां से भेजी और भेजने वाले के विरूद्ध सार्वजनिक रूप से ऐसी कार्यवाही हो जो दूसरे ऐसा प्रयास न कर सकें। और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर गोपनीय रूप से नजर रखी जाये और जनता में यह संदेश दिया जाये कि अगर ऐसी कोई सूचना किसी को कहीं से मिलती है तो वह बड़े अधिकारियों को दे उसका नाम गोपनीय रखा जायेगा। तभी आम आदमी को विश्वास में लेने से ऐसी सूचनाओं से छुटकारा मिल सकता है और उनके होने वाली संभावनाएं भी कम होंगी बाकी तो घर से कोई अगर कुछ सोचकर निकलता है तो उसे पूरा करने की कोशिश जरूर करेगा आवश्यकता इस बात की है कि हमें उसकी सोच और योजनाओं को विफल करने के लिए कौन सा तंत्र विकसित करना है।
वरना पुराने समय से ग्रामीण कहावत जो सुनते चले आ रहे है कि कुछ लोग गांव में आये दिन शेर आया शेर आया अफवाह फैलाते थे उनकी इस आदत से परेशान गांववासी लापरवाह हो गये और एक दिन वाकई में शेर आकर पूरा विध्वंस मचाकर चला गया क्योंकि सब यहीं सोच रहे थे कि यह सब अफवाह है इसे ध्यान में रखकर हमें लापरवाह होने की आवश्यकता नहीं है सिर्फ ऐसी सूचनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण और गोपनीय तरीके से कुछ करना होगा। हमारे अफसर नये हो या पुराने उच्च पदों पर हों या कनिष्ठ पदों पर वह वर्तमान माहौल और कब क्या हो सकता है इस बारे में आसानी से सोच सकते हैं उन्हें इसके लिए टीम बनाकर काम करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भी इस संदर्भ में कुछ एतियात कदम उठाने चाहिए क्योंकि ऐसी सूचनाएं कभी भी और कहीं से सुनने को मिलती हैं और कुछ हो ना हो आम आदमी में भय जरूर उत्पन्न हो जाता है बस यह अच्छा है कि इन्हें लेकर अभी अफवाहें उड़नी शुरू नहीं हुई हैं इसलिए समाज में शांति और भयमुक्त वातावरण बना हुआ है। मेरा यह भी मानना है कि कचहरी स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कुछ ऐसे यंत्र लगाये जाये जो छोटा-बड़ा किसी भी तरह का विध्वंस कारी सामान ले जाना चाहे तो उसका पता गेट पर ही लग जाये और कोई कहेें कि इतनी व्यवस्थाएं कहां कहां की जायेंगी तो भैया अगर सुरक्षित रहना है तो यह करना ही होगा हां यह कह सकते हैं कि पुलिस और शासन प्रशासन के अधिकारी इस काम में बड़ें उद्योगपतियों व्यापारियों और आजकल शिक्षा के नाम पर मोटा धन कमा रहे स्कूल संचालकों आदि से आर्थिक मदद लेकर यह व्यवस्था लागू कर और करा सकते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
