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    Home»देश»कानून भी बन गया समाज की सोच भी बदल रही है युवतियां भी हर क्षेत्र में स्थापित कर रही हैं कीर्तिमान लेकिन दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं कब रूकेंगी
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    कानून भी बन गया समाज की सोच भी बदल रही है युवतियां भी हर क्षेत्र में स्थापित कर रही हैं कीर्तिमान लेकिन दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं कब रूकेंगी

    adminBy adminMay 16, 2026No Comments6 Views
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    दिल्ली के निर्भया हत्याकांड को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि बीते दिनों फिर बस के अंदर एक बलात्कार की घटना घट गयी। पिछले दो दशक में जिस प्रकार से महिलाएं हर क्षेत्र में उन्नति के शिखर की ओर बढ़ रही हैं और स्वावलंबी बन रही है तथा उन्हें अपनी सुरक्षा की जो सबक सिखाए जा रहे हैं और कई बार पढ़ने सुनने को मिला कि महिलाओं ने छेड़छाड़ करने वाले सोहदों की जमकर पिटाई की और उन्हें थाने ले गयीं ऐसा लगा था कि शायद अब निर्भया जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
    क्योंकि इसके उपरांत दुष्कर्मी व बलात्कारियों को सख्त से सख्त सजा देने के नियम भी बनें और नागरिक भी जागरूक हुए और भारत आज विज्ञान तकनीकी शिक्षा विकास के क्षेत्र में बेटियां निरंतर आगे बढ़ रहीं है सीमाओं पर सुरक्षा कर रहीं है लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं सबसे बड़ी बात वह स्वावलम्बी बन रहीं हैं ग्रामीण परिवेश में पली बड़ी बच्ची या शहरों में पलने वाली लड़कियां अब सब अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर सर्तक हैं कई प्रकार के विभिन्न कंपनियों ने ऐसे तकनीकी यंत्र भी बनाये हैं जो छेड़छाड़ करने वालों के लिए काल बन जाते हैं तो हाथ पैर तोड़ने और आंखों में मिर्ची डालकर सबक सिखाने के मामले भी सामने आ रहे हैं फिर भी आखिर वह क्या कारण है जो आये दिन मीडिया में बच्चियों से छेड़छाड़ बलात्कार और दुष्कर्म की खबरे पढ़ने सुनने और देखने को मिलती है। वह भी ऐसी परिस्थितियों में जब वर्तमान में नौजवान पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ सबकी सोच खुली हो गयी है और सब अपने अपने अधिकारों और क्या अच्छा है और क्या बुरा यह सोचते हैं और सम्मान भी करते हैं एक दूसरे का।
    आखिर फिर वह क्या कारण है कि निर्भया जैसी घटना और बच्चियों से छेड़छाड़ रोकने व दुष्कर्म बलात्कार की घटनाओें को रोकने के इतने उपाय हो रहे है फिर भी ऐसी शर्मनाक घटनाएं आखिर क्यों सामने आ रही हैं कुछ लोगों का कहना है कि कम वस्त्र या टाइट पहने से ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है तो ऐसे कपड़े पुरूष भी पहनते हैं जहां तक मेरा मत है रहन सहन खानपान और अपनी मन पसंद वस्त्र पहनना हर व्यक्ति का अधिकार है चाहे वह लड़के हों या लड़कियां तो आखिर ऐसा क्या हो कि जो इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगे क्योंकि कहा जाता है कि बच्चों को शुरू से ही अगर अच्छे संस्कार दिये जाये और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा की जाये तो यह घटनाएं रूक सकती है मगर कितने ही मामलों में देखा गया है कि बहुत ही संस्कारवान आर्दश परिवार के बच्चे निरंकुश और हर मामले में निपुण होते हैं उन्हें कैसे रोका जाएगा। अब अगर कोई कहे कि डांट डपटकर ऐसे मामलों में कमी आ सकती है तो ज्यादा देखने में आता है कि जिन बच्चों में ज्यादा बंदिश होती है वह भी विद्रोही हो जाते हैं।
    कुल मिलाकर हमे जो लगता है वह यह है कि ऐसी दरिंदगी रोकने के लिए सामाजिक सोच बदलने की तो आवश्यकता है ही सख्त कानून भी अपराधियों को सजा देने के लिए जरूरी है, वर्तमान समय में जो पिछले कुछ वर्षों से वेब सीरिज बननी शुरू हुई और उनमें जो गंदगी हिंसा और यौन शोषण आदि की घटनाएं बढ़ा चढ़ाकर दिखाई जा रही है वह भी इसके लिए जिम्मेदार है पूर्व में हमारी फिल्में और कलाकर संयम में रहकर ऐसा कोई काम करते थे जो समाज के लिए अच्छा हो चाहे बुरे लोगों का अंत रहा हो या कोई और विषय। मेरा मानना है कि वेब सीरिजों पर जो समाज में एक गलत भावना को उभार रहीं है उन पर रोक लगे और इन्हें अनुमति देने से पहले फिल्म सेंसर बोर्ड और उनके सदस्य अवलोकन करें और कहीं भी कुछ ऐसा लगता है कि जिन्हें देखकर समाज में गलत सोच बढ़ सकती हैं उन्हें देखकर हटाया जाये और फिर प्रसारण की अनुमति दी जाये और सबसे बड़ी बात यह है कि हम जो अपने पन्ने भरने और टीआरपी बढ़ाने तथा लाइक और सबसक्राइब बढ़ाने के लिए जो कभी कभी बुरे काम करने वालों का महिमामंडिप करने लगते है या उनके पक्ष में संवेदनशीलता की आड़ में कहे अनकहे रूप में माहौल बनाने की कोशिश करते हैं यह बिन्दु भी ऐसी घटनाओं में बढ़ोत्ती में भी बढ़ने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि हमारे सोच से आप सहमत न हों मगर अगर हम प्रेमी के हाथों पति को मरवाने वाली नीला ड्रम जैसी घटनाओं की जिम्मेदार अपराधियों की छोटी से छोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने में और कई मामलों में उनके प्रति संवेदन प्रदर्शित करने की कोशिश करते हैं ऐसे मामले भी हमारी माता-बहनों के लिए पीढ़ा दायक हो सकते हैं। सरकार को चाहिए कि जिस प्रकार से किसी भी तरह की अपराधिक घटनाओं में महिलाओं का चित्र और नाम प्रकाशित करने पर पूर्ण रोक है उसी के समान चाहे महिलाओं से संबंध अपराध हो या किसी और क्षेत्र के उनसे संबंध अपराधियों को क्या सजा दी जा रही है ऐसी खबरे प्रकाशित हों ना कि आज उसने बच्चे को जन्म दिया वह तारीख पर आई तो मुस्करा रही थी जैसे शब्दों का प्रयोग प्रतिबंधित हो जिससे मानसि विकृती के लोगों को यह एहसास हो कि जो वह करने जा रहे हैं उसके क्या परिणाम हो सकते है। बाकी तो सरकार कानून बना ही रही है समाज भी इस संदर्भ में स्पष्ट विचारधारा रखता है मां-बाप भी बच्चों को वर्तमान समय के अनुकूल अच्छे संस्कार दे रहे हैं इसलिए भगवान ही कोई ऐसा चमत्कार कर सकता है जो छेड़छाड़, दुष्कर्म की घटनाओं में कमी ला सके।
    (प्रस्तुति:- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

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