मुजफ्फरनगर, 15 मई (ता)। खतौली के गंगनहर कांवड़ पटरी मार्ग पर गत दिवस सड़क किनारे कूड़े के ढेर में बड़ी मात्रा में सरकारी दवाएं मिलीं। इन दवाओं के पैकेटों पर “Government Supply Only” अंकित था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ये सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी गई थीं। बरामद दवाओं में आयरन सिरप, आयरन टैबलेट, कब्ज और अन्य सामान्य बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं। यह उल्लेखनीय है कि कई दवाएं अगस्त 2026 तक वैध पाई गईं।
स्थानीय लोगों ने सुबह सैर के दौरान कूड़े में दवाओं का यह बड़ा जखीरा देखा और तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रभारी डॉ. सतीश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सभी दवाओं को कब्जे में लेकर सुरक्षित किया और बाद में इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर सीज कर दिया गया।
इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि सरकार गरीब मरीजों के लिए मुफ्त दवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन उपयोग योग्य दवाओं का कूड़े में मिलना गंभीर लापरवाही या अनियमितता का संकेत देता है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब अस्पतालों में दवाओं की कमी बताई जाती है, तब इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं नष्ट कैसे की गईं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खतौली के प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि यह मामला उनके सीएचसी से जुड़ा है, तो भी जांच होगी। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की दवा वितरण और स्टॉक प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
आशंका है कि या तो दवाओं के रखरखाव में गंभीर लापरवाही हुई है या फिर इन्हें जानबूझकर नष्ट किया गया हो। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में दवाएं फेंकना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा पैदा करता है। इससे बच्चों और जानवरों के संपर्क में आने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है। फिलहाल, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर रहे हैं ताकि दवाओं के स्रोत और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों का पता लगाया जा सके।
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