राज्य सरकार केंद्र द्वारा जारी विकसित भारत जीरामजी योजना को यूपी में लागू कराने जा रही है। इसके तहत फसलों की कटाई बुवाई के लिए मजदूरों को खेत में काम करने के दौरान खाली रहने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। ग्राम विकास विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया और और कैबिनेट में इसे पास कराने की तैयारी है। जुलाई में राज्य सरकार को इसे पूरी तरह लागू करना होगा। बताते चलें कि मनरेगा के स्थान पर जीरामजी योजना की शुरुआत पर कांग्रेस सहित कई दल इसका विरोध कर रहे हैं। मेरा मानना है कि मजदूर की सुविधा और रोटी उसे मिलती रहे चाहे वह मनरेगा से मिले या जीराम जी के माध्यम से। खबर है कि योजना में गड़बड़ी रोकने के लिए इसका सत्यापन कराया जाएगा जो जरुरी है क्योंकि सुनने को मिलता है कि साधन संपन्न लोग गरीबों के लिए बनी योजना का अफसरों की मिलीभगत से लाभ हड़पने लगते हैं। एक जानकारी अनुसार मनरेगा में २.४३ करोड़ पंजीकृत, ०१.२१ करोड़ सक्रिय मजदूर, ०१.८२ करोड़ जांच कार्ड जारी ८६.१५ लाख सक्रिय कार्ड बताए गए हैं। योजना कोई बुरी नहीं है अगर आंकड़ों के अनुसार जीरामजी में मनरेगा से ज्यादा सुविधा मिलती है कोई बुराई नहीं है। देश के बेरोजगारों, मजदूरों के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है जिससे उन्हें परिवार का पालन पोषण हो सके। मेरा मानना है कि इन दोनों योजनाओं में जिन मजदूरों को काम मिला और जॉब कार्ड बने थे जब वो काम करने की स्थिति में नहीं रहते तो उन्हें इतनी पेंशन जरुर दी जाए कि वो अपना बुढ़ापा जरुर काट सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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