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    Home»देश»जगन्नाथ मंदिर को वापस मिलेगी 300 करोड़ की 57 एकड़ जमीन, 65 साल पुरानी लीज रद
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    जगन्नाथ मंदिर को वापस मिलेगी 300 करोड़ की 57 एकड़ जमीन, 65 साल पुरानी लीज रद

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 11, 2026No Comments5 Views
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    भुवनेश्वर 11 जुलाई। ओडिशा राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यव्रत साहू ने एक ऐतिहासिक फैसले में पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर की करीब 57 एकड़ मूल्यवान भूमि को पुनः मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 300 करोड़ रुपये बताया गया है।

    खुर्दा जिले के जटनी तहसील अंतर्गत कुड़ियारी मौजा स्थित यह भूमि वर्ष 1961 में औद्योगिक विकास के लिए एक निजी कंपनी को लीज पर दी गई थी। इसके बाद से यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में फंसा हुआ था।

    सत्यव्रत साहू की अध्यक्षता वाली राजस्व बोर्ड की अदालत ने दो पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 1961 की लीज को अवैध घोषित कर दिया। अदालत ने कहा कि यह लीज ओडिशा हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा 19 का उल्लंघन करती है, क्योंकि इसके लिए एंडोमेंट कमिश्नर (धार्मिक न्यास आयुक्त) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य था, जो नहीं ली गई थी।

    अदालत ने जटनी तहसीलदार को निर्देश दिया है कि वह रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में आवश्यक संशोधन कर भूमि को भगवान जगन्नाथ, पुरी के नाम दर्ज करे। यह विवादित 57 एकड़ भूमि मूल रूप से ‘गोपबंधु स्ट्रॉ एंड पेपर बोर्ड्स लिमिटेड’ नामक निजी कंपनी को उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से लीज पर दी गई थी।

    हालांकि, जांच में सामने आया कि वहां कभी कोई उद्योग स्थापित नहीं किया गया। साथ ही मंदिर को इस भूमि से कोई आर्थिक लाभ भी नहीं मिला और भूमि आज तक पूरी तरह खाली पड़ी हुई है।

    मैदानी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड ऑफ राइट्स किसी संपत्ति का स्वामित्व स्थापित नहीं करता और यदि वह किसी अवैध लेन-देन के आधार पर तैयार हुआ हो तो उसमें संशोधन किया जा सकता है।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उक्त भूमि को राजस्व अभिलेखों में ‘अनाबादी-पुरातन पतित’ (बंजर/परती भूमि) श्रेणी में दर्ज किया जाए। यह फैसला श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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