Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप
    • एफआईआर रद्द करवाने पटना हाईकोर्ट पहुंचे खान सर
    • गर्मी और लू अपने पूरे शबाब पर, परिजनों के साथ साथ अपना भी पूरी तौर पर ध्यान रखें
    • अंतरराज्यीय बच्चा चोर गैंग का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार; हरिद्वार से 72 घंटे में बच्ची बरामद
    • पाकिस्तान टीम की साहिबजादा फरहान करेंगे कप्तानी
    • रोहित-हार्दिक अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में दिखाएंगे दम
    • सोनाली बेंद्रे के लिए राख का सफर चुनौतीपूर्ण लेकिन संतोषजनक अनुभव साबित हुआ
    • अहमदाबाद और गांधीनगर में बम विस्फोट करने की धमकी
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»पक्षपात के चश्मे से नहीं पीड़ा भरी से भी देखा जाना चाहिएः अखिलेश
    देश

    पक्षपात के चश्मे से नहीं पीड़ा भरी से भी देखा जाना चाहिएः अखिलेश

    adminBy adminOctober 4, 2025No Comments8 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    लखनऊ 04 अक्टूबर। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘क्राइम इन इंडिया 2023′ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के स्थिति की तारीफ की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में यूपी में सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों की संख्या शून्य रही। ऐसे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि भाजपा सरकार के कामकाज को सिर्फ पक्षपात के चश्मे से नहीं, बल्कि ‘पीड़ा भरी आँख’ से भी देखा जाना चाहिए।

    सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि एक आँकड़ा ये भी है। भाजपा सरकार के काम को सिर्फ पक्षपात के चश्मे से नहीं, पीड़ा भरी आँख से भी देखा जाए। उप्र में दलित दमन चरम पर है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि एक टीवी शो इस आँकड़े पर भी होना चाहिए। एक होर्डिंग इस सच का भी लगना चाहिए। एक विस्तृत रिपोर्ट इस पर भी समाचार के रूप में प्रसारित-प्रकाशित होनी चाहिए। एक एसआईटी इसकी विवेचना के लिए भी बननी चाहिए। एक अध्याय इसके लिए भी, पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए।

    अखिलेश यादव ने ये भी कहा, एक जाँच आयोग इसके लिए भी बैठाया जाए। एक विशेष वाहिनी, दलित-दमन के उन्मूलन के लिए भी बनाई जाए। एक श्वेतपत्र इस काले अपराध पर भी आना चाहिए। एक रोड शो इस समस्या के बारे में भी जागरूकता फैलाने के लिए निकाला जाए। एक ‘पाँच हज़ार वर्षीय’ आयोजन, इस ऐतिहासिक उत्पीड़न की ‘पंच सहस्राब्दी’ के रूप में, चेतना जगाने के लिए भी आयोजित किया जाए।

    गौरतलब है कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत कम रही। देश में कुल अपराध दर 448.3 थी, जबकि यूपी में यह केवल 335.3 दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012-2017 के बीच यूपी में 815 दंगे हुए थे, जिनमें 192 लोग मारे गए। वहीं 2007-2011 में 616 घटनाओं में 121 मौतें हुईं। इसके विपरीत, 2017 के बाद कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। बरेली और बहराइच में हुई दो हिंसक घटनाओं को भी सरकार ने 24 घंटे के भीतर नियंत्रित कर शांति बहाल कर दी।

    Akhilesh Yadav lucknow Samajwadi Party tazza khabar tazza khabar in hindi uttar-pradesh news
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप

    June 10, 2026

    एफआईआर रद्द करवाने पटना हाईकोर्ट पहुंचे खान सर

    June 10, 2026

    गर्मी और लू अपने पूरे शबाब पर, परिजनों के साथ साथ अपना भी पूरी तौर पर ध्यान रखें

    June 10, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.