यूजीसी बिल और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से आशीर्वाद लेने के बाद कानपुर में केशव नगर स्थित अपने आवास पहुंचे निलंबित पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री ने मां गीता देवी और ताऊ का आशीर्वाद लेकर वाराणसी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर यूजीसी और शंकराचार्य के अपमान का मुददा उठाया। यह उनका अपना निर्णय था लेकिन अब छह फरवरी तक इस काले कानून को वापस नहीं लेने पर सात फरवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन की बात कही है। उन्हों कहा कि उनके साथ देश के अनेक संगठन हैं। उन्होंने सीएम योगी को अपना बताया इसमें कोई बुराई नहीं है। उनका यह कहना कि एससी एसटी एक्ट से ८५ प्रतिशत लोग प्रभावित है और इसमें दर्ज ९५ प्रतिशत केस झूठे होते हैं। यह उनकी अपनी सोच है लेकिन उनके द्वारा केंद्र व यूपी सरकार में टकराव व केंद्र सरकार द्वारा २०२७ में यूपी में योगी को अनकहे रूप से हराने की बात कही गई और बोले कि वर्तमान में लोकसभा चुनाव हो तो एक सीट भी नहीं जीत पाएगी क्योंकि कोर वोटर उनसे अलग हो चुका है। उन्होंने कहा कि यूपी व केंद्र सरकार में टकराव के तहत यूजीसी बिल लाया गया ताकि यूपी सरकार का अहित हो। उनका कहना है कि यह एक सिविल वार की तरह था और इनके पीछे गुजरात की कंपनियों की कमीशनखोरी यूपी के ३० लाख करोड़ के बजट में दिख रही है। अलंकार द्वारा इस्तीफा वापस ना लेने की कही गई बात उनका अपना मत है। लेकिन इन मुददों को लेकर राजनीति करने और केंद्र सरकार तथा पीएम नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह के खिलाफ जो विषवमन किया जा रहा है वो सही नहीं कहा जा सकता। वो अपना कोई भी आंदोलन चलाएं, संविधान के तहत है तो कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर समाज में विभाजन होता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई को ध्यान में रखकर उनके द्वारा पीएम मोदी और अमित शाह को बदनाम करने और विवादों में फंसाने की जो कोशिश की जा रही है वो उन्हें रोकनी चाहिए। क्योंकि एक बात वो समझ लें कि उनके कुछ भी कहने से पीएम मोदी और अमित शाह पर आम आदमी का विश्वास डोलने वाला नहीं है। जहां तक उनका कथन है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने जिस प्रकार भारत को लूटा था उसी प्रकार वेस्ट इंडिया कंपनी देश को बर्बाद करने पर तुली है। उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी इसके सीईओ और अमित शाह एमडी हैं। जहां तक गुजरात की कंपनियों के कमीशन का मुददा है इस बारे में जांच होनी चाहिए और अगर कोई कार्य होना है तो वो यूपी की कंपनियों के माध्यम से हो। मुझे लगता है कि अब अलंकार अग्निहोत्री जो गलती इस्तीफा देकर कर चुके हैं उससे बचने के लिएऐसी बातें कर रहे हैं जिससे सरकार उन्हें माफ कर दें। अगर उन्हें लगता है कि वो सही है तो वह नौकरी से वीआरएस लेकर अपनी बात कहने के लिए मैदान में आना चाहिए। उन्हें पता चल जाएगा कि कितने संगठन उनके साथ हैं। अगर वो ऐसा करते हैं तो कुछ ही दिनों में उनका नाम मीडिया में ढूंढने से भी ना मिल पाएं।
मुझे लगता है कि केंद्र व प्रदेश सरकार को एप्सटीन के ईमेल में जो जिक्र किया गया है उसमें ही इस बात को लेकर जांच होनी चाहिए कि कहीं इस्तीफा देेने वाले पीसीएस अधिकारी जैसे व्यक्ति का तो कोई हाथ नहीं है। मेरा मानना है कि कानून व विदेश मंत्रालय को इस मेल जिसमें ३० लाख पन्नों की एप्सटीन फाइलें जारी की गई हैं उसमें पीएम मोदी का नाम जोउ़ने की कोशिश किसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति की कारस्तानी कही जा सकती है इसलिए विदेश मंत्रालय अमेरिका से इस बारे में नाराजगी जाहिर करेें और कांग्रेस भी ऐसे मुददों को लेकर पीएम को बदनाम ना ही करे तो अच्छा है
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- अंडर-19 विश्वकप जीतने के लिए वैभव सूर्यवंशी और टीम को बधाई
- डिजिटल ठगी में 25 हजार का मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं, रिजर्व बैंक के अफसर मुंह बंद करने की बजाय ठोस उपाय ढूंढे
- पीएम मोदी के गुरुमंत्र को आत्मसात करें छात्र, अंकों के पीछे ना भागकर खुद को जीवन की कसौटी पर कसें अभिभावक
- भारत का देसी एआई 22 भाषाओं में बोलेगा, इसी महीने आएगा टेक्स्ट वर्जन
- करीना कपूर एलओसी कारगिल फिल्म के सीन को याद कर भावुक हुईं
- प्रयागराज के IVF सेंटर पर सौदा, नाबालिग को शादीशुदा बताकर एग्स निकलवाने वाली 4 महिलाओं समेत 5 गिरफ्तार
- पेराई क्षमता बढ़ी बागपत चीनी मिल की
- बीड़ी के धुएं ने रोक दी मथुरा में ट्रेन
