इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर द्वारा अधिवक्ता मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई टिप्पणी महत्वपूर्ण है। आदेश में प्रदेश के डीजीपी अभियोजन को राज्यभर में वकीलों के खिलाफ लंबित मामलों का ब्यौरा तैयार करने का आदेश दिया है। अधिवक्ता मोहम्मद कफील ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ परिवारवाद को खत्म करने के आदेश को चुनौती दी थी। खबर के अनुसार पता चला कि याची गैंगस्टर समेत कई अपराधिक मामलों में शामिल है। इसका ध्यान रखते हुए जो यह टिप्पणी की गई कि रसूखदार पदों पर बैठे दागी वकील विधि व्यवस्था के खतरा है महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कानून का पालन करने वाले अधिवक्ताओं की भी छवि प्रभावित होती है। मेरा मानना है कि केंद्र व प्रदेश सरकारें पुलिस प्रशासनिक अधिकारी एक क्रीमीलेयर में शामिल सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ भी इसी प्रकार का जांच अभियान चलना चाहिए। जो मुह में राम बगल में छुरी वाली कहावत अपनाने वाले सफेदपोश जो अवैध कमाई व जुगाड़ के आधार पर सामाजिक धार्मिक और शैक्षिक संस्थाओं में पदों पर रहने के साथ गलत जानकारी के आधार पर प्रमुख पदों पर भी विराजमान होते रहे हैं जिससे देशहित में काम करने वाला आदमी पिछड़ रहा है। जानकारों के अनुसार ऐसे सफेदपोश अपराधी अपनी चाटुकारिता और पैसे के दम पर पावरफुल लोगों के अगल बगल रहने लगे हैं। कई भूमाफिया मंचों पर अधिकारियां के साथ बैठते हैं तो कई विभिन्न विवि से बिना कुछ किए पीएचडी की डिग्री लिए अधिकारियों के साथ संगठनों में पद संभाल रहे हैं। अगर समाज में सुधार लाना है तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि यह आम आदमी के बड़ा खतरा और सरकार को नुकसान पहुचाने का माध्यम बन रहे हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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