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    Home»देश»हाफ पेंट और मोबाइल जैसे मुददों पर रियायत दी जाए तो पंचायतों के फैसले पूर्ण रूप से हैं समाजहित में! हिंदू मुस्लिम एकता से धर्म परिवर्तन के मामलों में आ सकती है कमी, घायलों को समय से इलाज की ?
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    हाफ पेंट और मोबाइल जैसे मुददों पर रियायत दी जाए तो पंचायतों के फैसले पूर्ण रूप से हैं समाजहित में! हिंदू मुस्लिम एकता से धर्म परिवर्तन के मामलों में आ सकती है कमी, घायलों को समय से इलाज की ?

    adminBy adminDecember 29, 2025No Comments16 Views
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    वर्ष 2025 के अंतिम सप्ताह में देशभर में शादी विवाह में सुधार और सदभाव कायम करने से संबंध कई आयोजन हुए जिनमें शादी में डीजे बजाने पर कुरैशी मुस्लिम समाज ने कहा कि अगर बैंड और डीजे बजा तो मौलाना नहीं पढ़ेंगे निकाह। खबर के अनुसार सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुसार शादी विवाह में ढोल ताशे बैंड बाजे और डीजे नहीं बजेंगे। नियम तोड़ने वालों को ११ हजार रूपये जुर्माना देना होगा। कोसी कला सराय ईदगाह कमेटी द्वारा कुरैशी समाज की एक महापंचायत में चर्चा हुई कि शादियों में बैंड या डीजे परंपराओं के विपरित है। इसलिए इसे बंद करना जरूरी है। समाज के लोगो ने कहा कि अगर कोई परिवार समझाने के बाद भी नहीं समझता तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। तो दूसरी ओर सहारनपुर के अम्बेहटा में जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना असद मदनी ने कहा कि शादियों में फिजुलखर्ची बर्बादी का सबब है। इससे समाज को बचना चाहिए। आज मुसलमान शराब और नशे की ओर बढ़ रहे हैं जो कौम के लिए अच्छा नहीं है। वो बीते रविवार को इस्लामनगर रोड स्थित मदरसे के सालाना जलसे को संबोधित कर रहे थे। उनका कहना था कि अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ दीन की तालिम भी दें। तो दूसरी ओर बागपत जिले की तहसील बड़ौत में पटटीमहर में गत शुक्रवार को देशखाप थांबा चौधरी ब्रजपाल ङ्क्षसह के आवास पर देशखाप डांगी और मलिक खाप चौधरियेां की बैठक में फैसला लिया गया कि समाज में बढ़ती बुराईयों को देखते हुए लड़कों लड़कियों के स्मार्टफोन रखने हाफ पेंट पहनने पर पाबंदी लगाई जाए। शादियों को लेकर यह भी फैसला हुआ कि विवाह समारोज घर या गांव में होना ठीक है। मैरिज होम में शादी होने पर कई रीति रिवाज ठीक से नहीं निभाए जाते। इसके इलावा वॉटसऐप पर शादी के निमंत्रण को स्वीकारने का फैसला किया गया। चौधरियों ने कहा कि समाजहित में इस फैसले को किया जा रहा है। इसके लिए गांव गांव अभियान चलाया जाएगा।
    दूसरी ओर देवबंद नगर के मोहल्ला कोहला बस्ती में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इंजन मैकेनिक अनुज कुमार सैनी जो परिवार के साथ करीब २० साल से किराए के मकान में रह रहे थे। गुर्दे की बीमारी से मौत और परिवार में कोई जिम्मेदार ना होने के कारण पार्षद गुलफाम अंसारी ने अपने साथियों के साथ ४० वर्षीय अनुज की मौत पर सदभावना पेश करते हुए अर्थी तैयार की और अंतिम संस्कार की सभी रस्मों को पूरा कराया। हिंदु मुस्लिम इस सदभाव की सभी तारीफ कर रहे थे। क्येांकि यह तैयारी भी मुस्लिम समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार में आए हिंदू मेहमानों से पूछकर की और उनके ठहरने और खाने की भी तीन दिन तक व्यवस्था की।
    अगर देखें तो खाप पंचायत के निर्णय और मुस्लिमों द्वारा हिंदू का विधि विधान से अंतिम संस्कार कराने और मेहमानों के ठहरने और खाने की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है। समाज में पंचायतों में बुजुर्गों द्वारा बैठकर समाजहित में लिए जाने वाले निर्णय मुझे लगता है कि सभी को मानने चाहिए। देवबंद की घटना से समाज के सभी वर्गाे के लोगों को एक सबक लेकर भाईचारे के बीच ऐसा माहौल बनाने की आवश्यकता है जहां मनमुटाव सांप्रदायिकता की जगह ना हो। जहां तक खाप पंचायतों की बात करें तो वर्तमान में जबह जीवन में भागदौड़ बढ़ गई है और लड़के लड़की उच्च पदों पर रहकर देश विदेश में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि विवाह मंडप के स्थान पर गांव और घरों में शादिया एवं परंपराओं का निर्वहन करने और दहेज ना लेने तथा बैंड बाजे पर प्रतिबंध अत्यंत आवश्यक है। लेकिन बुजुर्गों को आधुनिकता के इस दौर में हाफ पेंट पहननने या मोबाइल के उपयोग पर रोक के निर्णय में आधुनिकता और संयम अपनाना होगा। जिससे जो बुराईयों को लेकर समाज में आर्थिक सामाजिक और अन्य कठिनाई उत्पन्न हो रही है उन्हें रोका जा सके। खाप पंचायतों के निर्णय सराहनीय है। मेरा मानना है कि भाईचारा और सदभाव की मजबूती के लिए एकजुट होकर दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने और यह भूलकर की घायल हिंदू है या मुसलमान उसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए और उसके परिवार को आर्थिक दबाव से मुक्ति और घायल को समय से इलाज कराने के निर्णय भी खाप पंचायतों को करना चाहिए जिससे कई प्रकार के अपराधों में कमी जरूर आएगी और सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जो सर्वसमाज और एकता का सपना देखते हैं वो भी पूरा होगा और सरकारी नीतियों का लाभ आम आदमी को मिलेगा। मुझे लगता है कि पंचायतों के फैसले सही से लागू होने लगे तो धर्म परिवर्तन के मामलों में भी कमी आएगी। अदालतों में जो लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है उसमें भी कमी आएगी। कुल मिलाकर अगर हम इस प्रकार का निर्णय लेकर आगे बढ़ें तो वर्ष २०२६ में समाजहित की कई शुरूआत हो सकती है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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