नई दिल्ली, 16 मई (ता)। राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पति के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की FIR रद्द करते हुए कहा कि यदि विवाह कानूनी रूप से वैध हो और पत्नी विवाह के समय बालिग हो तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद के तहत पति पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता। जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने कहा कि पीड़िता विवाह के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थी और उसने स्वयं आरोपी के साथ 12 अप्रैल 2021 को विवाह किया था। ऐसे में बाद में दर्ज कराई गई FIR “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” है।
मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अभियोग लगाने वाली महिला विवाह के समय बालिग थी और उसने स्वयं याचिकाकर्ता से विवाह किया था, बाद में FIR दर्ज कराना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।” मामले में दोनों पक्षों ने अंतरजातीय विवाह किया, जिसे लड़की के परिवार की स्वीकृति नहीं थी। विवाह विशेष विवाह अधिनियम के तहत संपन्न हुआ। हालांकि महिला ने बाद में दावा किया कि अश्लील वीडियो के आधार पर दबाव बनाकर उससे विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए याचिका दायर की, जबकि पत्नी ने विवाह निरस्त करने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं, जिनके खिलाफ अपीलें लंबित हैं। इसी बीच विवाह के लगभग दो महीने बाद महिला ने FIR दर्ज कर आरोप लगाया कि पति पिछले एक महीने से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और तस्वीरों का अवलोकन किया और कहा कि प्रथम दृष्टया विवाह आपसी सहमति से संपन्न हुआ प्रतीत होता है। अदालत ने कहा कि बाद में महिला ने अपना मन बदल लिया और उसके बाद दुष्कर्म का आरोप लगाया गया।
हाईकोर्ट ने IPC की धारा 375 के अपवाद 2 का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पत्नी नाबालिग नहीं है, तो पति द्वारा उसके साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि उस फैसले में स्पष्ट किया गया कि धारा 375 के अपवाद 2 के तहत पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों में सहमति का प्रश्न दुष्कर्म के अभियोजन के लिए कानूनी रूप से अप्रासंगिक हो जाता है, यदि पत्नी बालिग हो। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पीड़िता का विधिक रूप से विवाहित पति है, इसलिए उसके खिलाफ दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। अदालत ने FIR और उससे जुड़ी समस्त कार्यवाही रद्द की।
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