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    Home»देश»धार भोजशाला को हाई कोर्ट में माना मंदिर, हिंदू पक्ष की मांग मंजूर
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    धार भोजशाला को हाई कोर्ट में माना मंदिर, हिंदू पक्ष की मांग मंजूर

    adminBy adminMay 15, 2026No Comments4 Views
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    धार 15 मई। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है. मध्य प्रदेश की उच्च न्यायालय ने धार भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष की मांग को मंजूर कर लिया है. इस फैसले से पहले धार में सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए गए थे. हाई कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए धार भोजशाला को मंदिर का परिसर घोषित कर दिया है. हालांकि हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब धार भोजशाला को मस्जिद बताने वाला पक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट रुख करेगा या नहीं, ये अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है.

    फैसले में कोर्ट ने पारित किए गए ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाणों का हवाला देते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और न्यायालय वैज्ञानिक निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं कर सकता. अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐसे प्राचीन स्मारकों तथा ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण और संवर्द्धन सुनिश्चित किया जाए. यही कारण है कि पूरे परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI के अधीन ही रहने का निर्देश दिया गया है.

    हाई कोर्ट ने 2003 में ASI के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत हिंदू पूजा पर प्रतिबंध लगाकर मुसलमानों को नमाज की अनुमति दी गई थी. न्यायालय ने कहा कि वह आदेश हिंदू पक्ष के अधिकारों को सीमित करता था, इसलिए उसे बरामद निर्णय के अनुरूप हटाया जाता है. साथ ही अदालत ने मुस्लिम समुदाय के प्रति संवेदनशील रुख भी अपनाया: मुस्लिम पक्ष को नमाज-अनुष्ठान के लिए धार जिले में अलग से भूमि उपलब्ध कराने हेतु सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे.

    न्यायालय ने केंद्र सरकार और ASI को निर्देश दिया है कि वे परिसर की रक्षा, संरक्षण और संस्कृत शिक्षा से जुड़े निर्णय शीघ्रता से लें. कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी राज्य की जिम्मेदारी है ताकि तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रहें. गौरतलब है कि लंबे समय से हिंदू‑मुस्लिम दोनों पक्षों के दावे और ऐतिहासिक दलीलों के बीच कोर्ट का यह फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. अब यह देखना है कि मुस्लिम पक्ष कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता है या नहीं.

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