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    Home»देश»प्रत्यारोपण के लिए चंड़ीगढ़ से दो घंटे में पहुंचाया हृदय, मेरठ के 39 वर्षीय मरीज की बचाई जान
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    प्रत्यारोपण के लिए चंड़ीगढ़ से दो घंटे में पहुंचाया हृदय, मेरठ के 39 वर्षीय मरीज की बचाई जान

    adminBy adminSeptember 4, 2025No Comments123 Views
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    नई दिल्ली 04 सितंबर। चंडीगढ़ से दिल्ली तक ग्रीन कारिडोर बनाकर सर गंगाराम अस्पताल की टीम ने न केवल प्रत्यारोपण के लिए एक घंटा 55 मिनट में हृदय पहुंचाया, बल्कि सफल सर्जरी कर मेरठ निवासी 39 वर्षीय मरीज की जान बचाई। मरीज डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी और गंभीर माइट्रल वाल्व लीकेज की समस्या से पीड़ित था। इसके चलते वह पिछले चार वर्ष से सांस लेने में परेशानी झेल रहा था। सर्जरी के बाद अब मरीज तेजी से ठीक हो रहा है। सामान्य भोजन लेने के साथ ही उसने हल्का व्यायाम भी शुरू कर दिया है।

    अस्पताल के मुताबिक, मरीज की स्थिति गंभीर थी। पिछले छह माह में उसे मेरठ में दो बार आइसीयू में भर्ती होना पड़ा था। अगस्त में स्थिति बिगड़ने पर उसे सर गंगाराम अस्पताल लाया गया। आइसीयू में भर्ती कर उसकी हृदय क्रिया व रक्तचाप बेहतर करने और गुर्दे को सहारा देने के लिए उन्नत दवाएं दी गईं। इसके बाद नौ अगस्त को उसे राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकृत किया गया। पहली बार दिल्ली से ही हृदय मिला, पर प्रत्यारोपण के लिए वह उपयुक्त नहीं था। फिर 26 अगस्त की रात एनओटीटीओ ने सर गंगाराम अस्पताल को चंडीगढ़ में उपलब्ध एक उपयुक्त दाता हृदय की जानकारी दी। अस्पताल की रिट्रीवल टीम फौरन चंडीगढ़ रवाना हुई और 27 अगस्त की सुबह हृदय को एक कामर्शियल फ्लाइट से दिल्ली लाया गया। दोनों हवाई अड्डों ( चंडीगढ़ और दिल्ली) के साथ ही दिल्ली शहर में ग्रीन करिडोर बनाए गए। इसके चलते हृदय सुरक्षित अवस्था में केवल एक घंटा 55 मिनट में सर गंगाराम अस्पताल पहुंचाया जा सका।

    अस्पताल में पहले से तैयार कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डा. सुजय शाद के नेतृत्व में कार्डियक सर्जन डा. हिमांशु गोयल व डा. अमन माखीजा, एनेस्थेटिस्ट डा. महेश्वरी की टीम ने सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण सर्जरी कराई। प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद नया हृदय तुरंत कार्य करने लगा। मरीज के तेजी से रिकवर होने पर 18 घंटे के भीतर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। उसने सामान्य भोजन और हल्का व्यायाम भी शुरू कर दिया गया है। डा. सुजय शाद ने कहा कि यह प्रत्यारोपण एनओटीटीओ, रिट्रीवल और ट्रांसप्लांट टीमों के साथ ही दो राज्यों में बनाए गए ग्रीन करिडोर के साझा प्रयास से संभव हुआ । हृदय का दो घंटे से कम समय में पहुंचना इस सर्जरी की सफलता में निर्णायक साबित हुआ।

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