नई दिल्ली, 16 जनवरी। हेयर ट्रांसप्लांट को अब सैलून सेवा नहीं, बल्कि पूरी तरह चिकित्सकीय सर्जरी माना जाएगा। बढ़ती शिकायतों, फर्जी क्लिनिकों और गलत इलाज से हुई मौतों के बाद केंद्र सरकार इस क्षेत्र पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है।
नए प्रावधानों के तहत हेयर ट्रांसप्लांट केवल योग्य त्वचा रोग विशेषज्ञ और प्लास्टिक सर्जन ही कर सकेंगे, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार अब इसे कॉस्मेटिक सैलून की श्रेणी से हटाकर सर्जिकल प्रैक्टिस की श्रेणी में डाल रही है। इसका उद्देश्य 252 मिलियन डॉलर के इस उद्योग में फैली गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना है। यह जानकारी तीन सरकारी अधिकारियों के आधार पर सामने आई है। वहीं, हेयर ट्रांसप्लांट में बालों की जड़ों का प्रत्यारोपण होता है और इसमें एनेथिसिया, साफ-सुथरी जगह और विशेष सर्जिकल विशेषज्ञता की जरूरत होती है। यह मई 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद किया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि हेयर ट्रांसप्लांट एक एस्थेटिक सर्जरी है। इसे मरीज की जानकारीपूर्ण सहमति के साथ केवल योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित सर्जन ही कर सकते हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इन अंतिम नियमों को हाईकोर्ट में इसी विषय से जुड़ी एक याचिका पर फैसले के बाद ही अधिसूचित करेगा।
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