नई दिल्ली, 17 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे के लिए ज्यादातर अजनबी होते हैं, इसलिए शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत एक ऐसे व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर झूठे विवाह के वादे पर दुष्कर्म का आरोप है।
शादी के झूठे वादे की वजह से रेप की शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप के बारे में नौजवानों को सावधान किया। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि इस सोच को पुराने जमाने का कहा जा सकता है।
शादी के झूठे वादे पर रेप के केस का सामना कर रहे एक शख्स की बेल पिटीशन पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्जल भुइयां ने सवाल उठाए कि जिस महिला की बात हो रही है, वह शख्स के साथ दुबई जाने के लिए कैसे मान गई, जहां दोनों के बीच फिजिकल रिलेशनशिप बने।
बेंच ने कहा कि यह सहमति से होता है। हम पुराने जमाने के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की बिल्कुल अजनबी होते हैं। उन्हें शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में सावधानी बरतनी चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उनके रिश्ते में चाहे जो भी अच्छा-बुरा हो, हम यह नहीं समझ पाते कि वे शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप कैसे बना सकते हैं। आपको बहुत सावधान रहना चाहिए, शादी से पहले किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए। इस मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि वह शख्स के कहने पर दुबई गई थी, और उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाए, और बाद में किसी और से शादी कर ली।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले ट्रायल और सजा के लिए सही नहीं हैं। उन्होंने दोनों पार्टियों से सेटलमेंट की संभावना तलाशने को कहा और उनके विचार जानने के लिए मामले की सुनवाई बुधवार तक टाल दी। उन्होंने कहा कि अगर वह इस बारे में इतनी सख्त थी तो उसे शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनमें ट्रायल किया जाए और सजा दी जाए, जब सहमति से रिश्ता हो।
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