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    Home»देश»लड़कियां पढ़ाई के दौरान प्रेग्नेंट हो जाती हैः आनंदीबेन पटेल
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    लड़कियां पढ़ाई के दौरान प्रेग्नेंट हो जाती हैः आनंदीबेन पटेल

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 8, 2026No Comments40 Views
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    लखनऊ 08 जुलाई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एकेटीयू दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं से खुलकर बात की। राजधानी के सिद्धीखेड़ा बालिका गृह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज कल लड़के-लड़कियां पहले भाग जाते हैं। फिर लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती है और ऐसे बच्चे बाद में सरकार के भरोसे हो जाते हैं। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता है और वे बालगृह में पहुंचा दिए जाते हैं।

    सामने बैठे छात्र-छात्राओं से उन्होंने कहा कि यह आप सबका पराक्रम है। ऐसा पराक्रम न करिए। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा भी बंगलौर पढ़ने गया था। मैंने कहा कि कोई लड़की पसंद हो तो बताना, मैं शादी कर दूंगी। हालांकि उसने ऐसा नहीं किया। आपको कोई पसंद आए तो पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर शादी कीजिए। मैं लव मैरिज की विरोधी नहीं हूं। लेकिन आत्मनिर्भर होने तक शादी न करिए, कुछ गलत न करिए।

    राज्यपाल ने आंगनबाड़ी, स्कूल-कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में हो रहे निर्माण कार्य की डिजाइन व उपयोगिता पर बड़े सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि यहां होने वाले निर्माण कार्यों को देखकर निराशा होती है। लाइट जलाने का बोर्ड कमरे के बीच में लगा होता है। आंगनबाड़ी में पीने के पानी के टैब इतने ऊंचे हैं कि बच्चे पहुंच नहीं पाते हैं।

    एक यूनिवर्सिटी में प्रथम तल पर एक तरफ वीसी, दूसरी तरफ रजिस्ट्रार का कमरा है और बीच में लाइब्रेरी प्रस्तावित की गई है। जबकि छात्रावास वहां से एक किलोमीटर दूर है।

    उन्होंने इन कमियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि निर्माण वालों की डिग्री फर्जी तो नहीं है। उन्होंने विवि प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि निर्माण में गुणवत्ता के साथ उपयोगिता का भी ध्यान रखें। निर्देश दिया कि हॉस्टल में मॉर्डन किचन बनाएं, आरओ प्लांट लगवाएं।

    राज्यपाल ने बताया कि आज मेडल पाने वालों में एकेटीयू के 16, सरकारी कॉलेज के 17 और प्राइवेट के 49 छात्रों को मेडल मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों में गरीब छात्र पढ़ने जाते हैं। क्योंकि यहां शुल्क कम होता है। अपेक्षाकृत प्राइवेट में ज्यादा फीस देकर पढ़ते हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक मेहनत करें।

    छात्रों को सही से सिखाएं। क्योंकि यहां गरीब के बच्चे आते हैं। इसी तरह प्राइमरी स्कूलों में भी गरीब बच्चे जाते हैं। सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक पढ़ाई में ध्यान दें। उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि प्रदेश में होने वाले निवेश से जुड़ी जानकारी वाली बुकलेट स्कूल-कॉलेजों, विश्वविद्यालयों के छात्रों को उपलब्ध कराई जाए। ताकि युवाओं को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने छात्रों से तकनीकी के साथ रचनात्मकता और संस्कृति को बनाए रखने की बात कही।

    एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि एनईपी 2020 लागू करने के साथ ही छात्रों को इंटर डिसीप्लीनरी व माइनर डिग्री भी दी जा रही है। ड्यूल डिग्री और बीबीए इस साल से शुरू कर रहे हैं।

    इंडस्ट्रियल रिसर्च प्रमोशन स्कीम लागू की है। हर कोर्स में एआई एप्लीकेशन की पढ़ाई अनिवार्य की है। छात्रों को बेहतर प्लेसमेंट के अवसर मिल रहे हैं। 4668 छात्रों ने आईबीएम की इंटर्नशिप की और 4000 रुपये स्टाइपेंड भी मिला है। कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी विकसित किए गए हैं।

    प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने आपको तैयार कर यहां तक पहुंचाया है, काफी कुछ दिया है। अब आपको समाज को वापस देने का समय आया है। आप अपनी सफलता के साथ समाज के लिए भी काम करें।

    उन्होंने कहा कि पीएम के सपनों के अनुरूप यूपी को स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाना है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा उच्च शिक्षा को शिखर पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। सीएम द्वारा रोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। एआई का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। साथ ही दुरुप्रयोग भी हो हो रहा है। एजेंटिंक एआई भी काफी महत्वपूर्ण है।

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