नई दिल्लीू, 27 अप्रैल (ता)। दिल्ली हाई कोर्ट ने विधानसभा चुनाव में नामांकन संग दाखिल शपथ पत्र में शैक्षिक योग्यता संबंधी जानकारी पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और विनोद कुमार की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 123 (चार) के तहत शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण नहीं माना जाएगा। अदालत ने यह निर्णय 2020 में करोल बाग क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे योगेंद्र चंदोलिया की उस याचिका पर दिया है, जिसमें उन्होंने आप के विशेष रवि के शपथ पत्र में गलत जानकारी दिए जाने का दावा करते हुए निर्वाचन को रद किए जाने की मांग की थी।
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में करोल बाग विधानसभा क्षेत्र से आप के विशेष रवि ने चुनाव जीता था। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी रहे चंदोलिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विशेष रवि ने नामांकन के दौरान योग्यता की गलत जानकारी दी। इससे मतदाता गुमराह हुए व चुनाव में विशेष रवि को लाभ मिला, जिसका असर परिणाम पर भी पड़ा। याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 123 (चार) का हवाला देते हुए तर्क किया कि ऐसी गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण है। हालांकि, पीठ ने तर्कों को खारिज कर कहा कि धारा 123 (चार) तब लागू होती है जब कोई उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार के बारे में गलत बयान देता है, जिसका उद्देश्य उम्मीदवार की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाना होता है।
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