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    Home»देश»लेह हिंसक आंदोलन में चार की मौत, 72 घायल; कर्फ्यू और इंटरनेट पर पाबंदी
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    लेह हिंसक आंदोलन में चार की मौत, 72 घायल; कर्फ्यू और इंटरनेट पर पाबंदी

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comSeptember 25, 2025No Comments6 Views
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    नई दिल्ली 25 सितंबर। लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को हिंसक हो गया। इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई और 30 पुलिस व सीआरपीएफ जवानों समेत 72 लोग घायल हुए हैं।

    भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि लद्दाख में हुई हिंसा कांग्रेस की खतरनाक साजिश का हिस्सा थी, जिसका मकसद देश में बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस जैसी परिस्थितियां पैदा करना था। आज लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों को ‘जेन जी’ द्वारा संचालित दिखाने की कोशिश की गई। लेकिन, जांच में पता चला कि यह ‘जेन जी’ का विरोध नहीं था, बल्कि कांग्रेस का था।

    भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा-कांग्रेस की मंशा खराब है। यह कांग्रेस की साजिश है। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्ला, इंशाअल्ला’ कांग्रेस का मुख्य नारा है। यह जार्ज सोरोस के साथ राहुल गांधी की साजिश है। चूंकि, वह जनता से समर्थन नहीं पा सकते, इसलिए देश को तोड़ने की साजिश रचते हैं।

    पात्रा ने कहा, राहुल गांधी बार-बार युवाओं को बांग्लादेश और नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने के लिए उकसाते हैं। इन दिनों फिलीपींस में यह सब हो रहा है। वह भारत में भी ऐसी ही स्थिति पैदा करना चाहते हैं। क्या यह कांग्रेस की सही लीडरशिप है?
    कांग्रेस और राहुल गांधी को यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत में इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। भारत हजारों साल पुरानी सभ्यता है। देश के लोगों में अच्छे-बुरे का फर्क समझने की क्षमता है। लोग जानते हैं कि प्रधानमंत्री और सरकार उनके लिए क्या कर रही है।

    दरअसल, वार्ता को स्थगित करने का अनुरोध मिलने पर, 25-26 सितंबर को अनौपचारिक चर्चाओं का एक दौर निर्धारित किया गया था। एबीएल के सह अध्यक्ष चेरिंग दोरजय लकरूक का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह सोनम वांगचुक के अनशन स्थल पर घोषणा कर रहे हैं कि एक प्रतिनिधिमंडल 26 सितंबर को बातचीत के लिए दिल्ली जा रहा है।
    एक अधिकारी ने पूछा कि अगर सरकार के साथ बातचीत सक्रिय थी, तो फिर भी हिंसा क्यों भड़की? लद्दाख और उसके युवाओं को कुछ लोगों की संकीर्ण राजनीति और कुछ कार्यकर्ताओं की निजी महत्वाकांक्षाओं की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। आशंका जताते हुए, केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि कैसे सोनम वांगचुक, जो लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर ‘आमरण अनशन’ कर रहे थे, लंबे समय से लद्दाख में अरब स्प्रिंग-शैली के विरोध प्रदर्शन की इच्छा जता रहे थे और उन्होंने नेपाल में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों का भी ज़िक्र किया था।

    वांगचुक बोले- हिंसा का कारण युवाओं में बढ़ती नाराजगी 

    सोनम वांगचुक ने लेह में हुई हिंसा पर दुःख जताया। उन्होंने कहा कि युवाओं में बढ़ती नाराजगी इस हिंसा का कारण बनी।उन्होंने बताया कि मंगलवार को एक 72 साल के आदमी और 62 साल की महिला को घायल होने पर अस्पताल ले जाना पड़ा था। यह घटना हिंसा का मुख्य कारण बनी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का कोई असर न होने से युवाओं में गुस्सा बढ़ा। कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 से 5 युवाओं की मौत हुई।

    बातचीत में उन्होंने कहा कि मुझे सही तो नहीं पता कि कौनसे हथियार प्रयोग किए गए, रबर गोली का तो सुना था। हालांकि, हमारे कई युवा मारे गए हैं। इससे लगता है कि असली गोली भी चलाई गई है।

    आगे की रणनीति पर कहा कि कल जब गृह मंत्रालय के बड़े अधिकारी आएंगे तो देखेंगे कि वो हमारी बात सुनते हैं कि पहले की तरह अनसुना करते हैं।हम पिछले 5 सालों से शांति और अनशन के माध्यम से अपनी बात रख रहे थे, अगर वो सुनी जाती तो युवाओं को सड़कों पर नहीं आना पड़ता। जब शांतिपूर्ण रास्ता मजाक बन रहा था तो ये रास्ता अपनाया।

    सोशल मीडिया पर आंदोलन को GenZ रिवोल्यूशन बताने की वायरल वीडियो पर सोनम ने कहा- मैने GenZ रिवोल्यूशन शब्द यूज नहीं किया।

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