देश में बढ़ते भ्रष्टाचार से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है लेकिन हमेशा यह देखा गया कि अफसर के सेवानिवृत होने के बाद ज्यादातर मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती। इसलिए कई विभागों के अफसर खुलकर खेलते हैं और जब फंसने की बारी आती है तो वीआरएस ले लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस बारे में शुरु कराए गए अभियान और भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रयासरत सीएम योगी के कड़े रुख का परिणाम कह सकते हैँ कि एक पूर्व समाज कल्याण अधिकारी की करीब ढाई करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। एक खबर के अनुसार लखनऊ कमिश्नरेट व शाहजहांपुर पुलिस ने वृद्धावस्था पेंशन घोटाले में मुख्य आरोपी पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार की लखनऊ में संपत्ति सीज और फ्रीज कर दी। संपत्ति में भूमि, गेस्ट हाउस और कार शामिल हैं। संपत्ति की कीमत दो करोड़ 53 लाख 85 हजार रुपये आंकी गई है।
जुलाई 2023 में वृद्धावस्था पेंशन घोटाले का भंडाफोड़ हुआ था। बुजुर्गों के बैंक खातों में हेरफेर कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया था। 28 जुलाई 2023 को जिला समाज कल्याण अधिकारी वंदना सिंह ने थाना सदर बाजार में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया था कि गिरोह बनाकर वृद्धावस्था पेंशन योजना के लगभग 2,52,39,000 रुपये का सरकारी धन का गबन किया गया। मूलरूप से मऊ के थाना मोहम्मदाबाद गोहना के गांव तुलसीपुर कुड़वा के रहने वाला राजेश कुमार गिरोह का सरगना था। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
चार अप्रैल के डीएम के आदेश पर अनुपालन में सोमवार को आरोपी के अवैध रूप से अर्जित कुल 2,53,85,000 रुपये की संपत्ति व वाहन को कमिश्नरेट लखनऊ व शाहजहांपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने सीज व फ्रीज कर दिया। आरोपी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को न तो खुर्द-बुर्द कर सकेगा और न ही विक्रय कर सकेगा। आरसी मिशन थाने के अपराध निरीक्षक अमित कुमार सिंह व कमिश्नरेट लखनऊ के उप-निरीक्षक ओमप्रकाश ने बताया कि लखनऊ की तहसील सरोजनी नगर में काकोरी रोड पर गांव सरोसा भरोसा में कुल 0.1848 हेक्टेयर भूमि व श्री मंगलम गेस्ट हाउस को सीज किया गया। इसकी अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ 39 लाख 85 हजार रुपये है। इसके अलावा 14 लाख रुपये कीमत की एक कार भी सीज की है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई को इससे भी गति मिलेगी कि उप्र के प्रमुख सचिव ने शासनादेश मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों के खिलाफ जांच व कार्रवाई का ब्यौरा ऑनलाइन होगा और आम आदमी भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अभी तक जो फंसता था वह किसी तरह अपनी फाइल दबवा देता था। लेकिन अब यह व्यवस्था ऑनलाइन होने से नागरिकों को भ्रष्टाचारियों से छुटकारा मिलने की उम्मीद बढ़ेगी क्योंकि काम में देेरी से आवेदक नाराज होगा तो वह इस पोर्टल पर शिकायत कर कार्रवाई की अपील कर सकता है। इसलिए कम या ज्यादा सुधार होगा। मेरे द्वारा कई दशक से मांग की जाती रही है कि भ्रष्टाचार करने वालों से सेवानिवृति के बाद भी उनकी संपत्ति से नुकसान की भरपाई करनी चाहिए क्योंकि सरकारी खजाने से पैसा जाता है तो इन्हें दर्द नहीं होता। घर से १०० रुपये भी लगते हैं तो इनके चेहरे पर शिकन आती है। जब जो पूर्व समाज कल्याण अधिकारी की संपत्ति कार गेस्ट हाउस और अन्य सामान अटैच किया गया है इससे बेईमान साबित हो चुके उन अफसरों से वसूली होने और सरकारी खजाने के नुकसान की भरपाई का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह कह सकते हैं कि पूर्व समाज कल्याण अधिकारी की संपत्ति जब्त होना शासन और सरकारी विभागों के लिए संदेश होगा कि कुछ भी गडबड़ करने पर बख्शे नहीं जाओगे।
(प्रस्तुतिः-रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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