नई दिल्ली 29 जून। दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये के कथित स्वास्थ्य उपकरण खरीद घोटाले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल को शनिवार को गिरफ्तार किया। वह फिलहाल निलंबित चल रही थीं।
एसीबी ने 650 करोड़ के इस घोटाले के मामले में डिप्टी कंट्रोलर (अकाउंट्स) नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया है। यह मामला दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसी के मुताबिक, तफ्तीश में सामने आया कि डीजीएचएस के अंतर्गत काम करने वाली सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के जरिए की गई खरीद में गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी की गई। डॉ. वत्सला पूर्व डीजीएचएच के रूप में इन खरीद प्रक्रियाओं से जुड़ी रही हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि वत्सला और चोपड़ा की भूमिका कथित अनियमितताओं में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इससे पहले इस मामले में केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख एवं हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को 19 जून को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन गिरफ्तारुयों के बाद जांच अब खरीद प्रक्रिया के प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी पहलुओं पर एक साथ केंद्रित हो गई है और 100 से अधिक डॉक्टर और अधिकारियों को इसके दायरे में ले लिया गया है। विभागीय कार्रवाई में पांच फार्मासिस्ट और दो अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं।
दोनों अधिकारियों को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियां टेंडर मंजूरी, वित्तीय अनुमोदन, भुगतान प्रक्रिया और खरीद संबंधी निर्णयों की परत-दर-परत जांच कर रही हैं। मामले में कई अन्य अधिकारियों को भी जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे जाने की संभावना है। जांच का दायरा अब केंद्रीय खरीद एजेंसी तक सीमित नहीं रह गया है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी एसीबी की एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू कर दी है। ईडी का फोकस मनी ट्रेल पर है और यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी भुगतान किन कंपनियों, खातों और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचा।

