लखनऊ, 22 अप्रैल (ता)। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में फर्जी डॉक्टर इंटर पास पकड़ा गया है। वह एक ट्रस्ट की आड़ में मरीजों और तीमारदारों से वसूली में भी लिप्त था। दो साल से वह सक्रिय था और केजीएमयू प्रशासन भी अनभिज्ञ बना हुआ, जिससे किसी न किसी की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि पकड़े गए फर्जी डॉक्टर पर महिला डॉक्टरों के मतांतरण कराने की भी आशंका जताई जा रही है, लेकिन अभी इसके कोई साक्ष्य नहीं मिले है।
कहा जा रहा है कि इंटर पास युवक पिछले दो वर्षों से खुद को डॉक्टर बताकर केजीएमयू परिसर में हिंदू छात्राओं को बाहर ले जाता था। गत दिवस चैक पुलिस के हत्थे चढ़े युवक से पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं, जिनसे केजीएमयू प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही ऐसे ही एक प्रकरण में डॉ. रमीजुद्दीन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
केजीएमयू के कार्यवाहक चीफ प्राक्टर अंकुर बजाज ने चौक कोतवाली में दी तहरीर में कहा है कि गत दिवस एमबीबीएस के कुछ छात्रों ने संदिग्ध गतिविधियों पर हस्साम अहमद नामक व्यक्ति को परिसर से पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।
पकड़ा गया युवक ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ नाम के एक ट्रस्ट के जरिए केजीएमयू में इलाज कराने आने वाले मरीजों और तीमारदारों से अवैध वसूली कर रहा था। युवक मड़ियांव के अजीज नगर का रहने वाला है। अब तक पूछताछ में सामने आया है कि इंटर पास हस्साम ने 13 अप्रैल 2026 को सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और डीन पैरामेडिकल डॉ. केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से एक नोटिस जारी कराई, जिसमें एमबीबीएस 2023 बैच के विद्यार्थियों को 29 अप्रैल को दिल्ली एम्स में होने वाली एक कान्फ्रेंस में भाग लेने के लिए कहा गया था। नोटिस में इस बात का उल्लेख था कि कान्फ्रेंस में अमेरिका के डॉक्टरों से मिलने का भी मौका मिलेगा। प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि वह छात्राओं को अलग अलग शहरों में कान्फ्रेंस के नाम पर दिल्ली या अन्य स्थानों पर ले जाने की साजिश करता था। आरोपित खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताता था, लेकिन जब उससे डिग्री मांगी गई तो वह कोई प्रमाण नहीं दे सका।
उसने स्वीकार किया का वह इंटर पास है। पुलिस को उसके पास से इंटर की मार्कशीट व कुछ दस्तावेज मिले हैं। यह भी पता चला कि हस्साम केजीएमयू परिसर में कई कैंप लगा चुका है, जिसमें वह अधिकतर हिंदू छात्राओं को शामिल होने के लिए कहता था। प्रशासन के अनुसार, आरोपित ने तीन हिंदू छात्राओं को चिह्नित कर उन्हें दिल्ली एम्स में अमेरिका के डॉक्टरों से मिलवाने का झांसा दिया था।
वह खासतौर पर हिंदू छात्राओं से दोस्ती करता था। डीन पैरामेडिकल डॉ. केके सिंह ने कहा कि उन्हें इस युवक के बारे में हाल ही में जानकारी हुई। हालांकि, छात्रों से पूछताछ में पता चला कि वह पिछले दो वर्षों से परिसर में सक्रिय था। इस बात की जांच की जा रही है कि फर्जी डॉक्टर बना युवक किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसके साथ कोई और भी इस नेटवर्क में शामिल है या नहीं। पुलिस पकड़े गए युवक के रमीजुद्दीन के साथ संबंधों के तार भी खंगाल रही है। डीसीपी कमलेश दीक्षित के अनुसार मुकदमा दर्ज कर सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
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