नई दिल्ली, 20 अप्रैल (प्र)। देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक्सप्रेसवे मौत के गलियारे नहीं बनने चाहिए और छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से जान नहीं जानी चाहिए।
मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चांदुरकर की बेंच ने कहा कि देश की कुल सड़कों में राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ 2 प्रतिशत हैं, लेकिन यहां करीब 30 प्रतिशत सड़क हादसों में मौतें होती हैं, जो बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सभी राज्यों को सड़क सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) सिर्फ जीने का हक नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में जीने की गारंटी भी है। अगर लापरवाही से किसी की जान जाती है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी में कमी मानी जाएगी। यह फैसला 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए बड़े सड़क हादसों के बाद लिया गया, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर इन निर्देशों को लागू करने को कहा है और 75 दिनों के अंदर रिपोर्ट भी मांगी है। कोर्ट ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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