नई दिल्ली, 21 अप्रैल (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में पढ़े-लिखे लोग भी ठगी के शिकार हो रहे हैं। शीर्ष अदालत ने डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए लोगों के साथ बड़े पैमाने पर हो रहे ठगी पर लगाम लगाने से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने गत दिवस टिप्पणी उस वक्त की जब केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने विभिन्न विभागों में साइबर ठगी पर अंकुश के मामले में बैठकें चलने और मुद्दा विचाराधीन होने के आधार पर डिजिटल अरेस्ट के मामले की सुनवाई 12 मई तक टालने का अनुरोध किया।
डिजिटल अरेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। गत दिवस सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वह उस महिला को आधिकारिक रूप से जानते हैं, जिसके सेवानिवृति के सारे लाभ धोखे से हड़प लिये गए। उसने अपनी सारी जमां पूंजी खो दी।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह चौकाने वाली बात है कि इतने पढ़े लिखे लोग भी इस तरह ठगी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अटार्नी जनरल से इस पहलू पर भी ध्यान देने को कहा। अटार्नी जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इन सभी मुद्दों पर विचार किया जा रहा है। बाद में कोर्ट ने अटार्नी जनरल का अनुरोध अनुरोध स्वीकार करते हुए डिजिटल अरेस्ट मामले की सुनवाई 12 मई तक स्थगित कर दी।
सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने डिजिटल गिरफ्तारी के पीड़ितों से जुड़े स्वतः संज्ञान मामलों का उल्लेख कर सुनवाई टालने का आग्रह किया। पीठ से कहा कि बैठकें हो चुकी हैं। हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इस पर सीजेआई ने एक बुजुर्ग महिला के मामले का जिक्र किया, डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए उसकी सेवानिवृत्ति के बाद मिली पूरी रकम ठग ली गई थी। सीजेआई ने बुजुर्ग महिला के मामले का जिक्र किया, जिसे वे अपनी आधिकारिक हैसियत से जानते थे। इस पर कोर्ट में मौजूद एक अधिवक्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष कोर्ट द्वारा डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
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