नई दिल्ली 21 जुलाई। केंद्र सरकार घरेलू रसोई में एलपीजी के विकल्प के रूप में एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस संबंध में नई नीति का मसौदा तैयार कर रहा है। इसमें एथेनॉल आधारित चूल्हों को बढ़ावा देने, आपूर्ति शृंखला विकसित करने और सब्सिडी देने जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, मंत्रालय उद्योग संगठनों और तेल विपणन कंपनियों के साथ प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है। योजना को मंजूरी मिलती है तो भविष्य में एलपीजी के साथ एथेनॉल भी घरेलू रसोई ईंधन का एक विकल्प बन सकता है। सरकार का मानना है कि इससे स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा। नई नीति का खाका सितंबर तक तैयार हो सकता है
पिछले कुछ वर्षों में देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ी है। मौजूदा समय में देश की उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर प्रति वर्ष से अधिक हो चुकी है। इस वित्त वर्ष में इसमें करीब चार अरब लीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। बावजूद इसके एथेनॉल उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में सरकार अतिरिक्त एथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना तलाश रही है।
देश में इथेनॉल का उत्पादन कितना
CareEdge की मई की रिपोर्ट के मुताबिक देश का इथेनॉल प्रोडक्शन सालाना 20 बिलियन लीटर से ज्यादा हो गया है. इस साल 4 बिलियन लीटर की अतिरिक्त क्षमता शुरू होने वाली है. सरकार के E20 (इथेनॉल-पेट्रोल) ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए सालाना खपत करीब 11 बिलियन लीटर है.
शराब बनाने वाली कंपनियों, दवा कंपनियों और केमिकल कंपनियों की सालाना खपत करीब 3-3.5 बिलियन लीटर है. इसके बाद करीब 7 बिलियन लीटर जो इथेनॉल बच जाता है उसका प्रयोग सरकार किचन के ईंधन के रूप में करना चाह रही है. इसके अलावा सरकार नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को इथेनॉल एक्सपोर्ट करने पर भी विचार कर रही है.
देश का एलपीजी आयात कितना
भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 से 65% हिस्सा विदेश से आयात करता है. देश में सालाना लगभग 3.3 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है. जो मासिक 15 से 17 लाख टन होता है.
भारत अपनी आयातित गैस का लगभग 90% हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ओमान से मंगाता है. लेकिन, अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते मध्य पूर्व के देशों में आपूर्ति व्यवधान ने भारत में एलपीजी की क्राइसिस खड़ी कर दी थी. इसके देखते हुए भारत ने अमेरिकी एलपीजी का आयात बढ़ाकर जून 2026 में 10 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर लिया.
24 अरब डॉलर की हो सकती है बचत
भारत इथेनॉल को एलपीजी के विकल्प के तौर पर देख रहा है. हालांकि, अभी तक भारत एलपीजी के लिए खाड़ी देशों और अमेरिका पर निर्भर है. लेकिन, इथेनॉल के प्रयोग से भारत इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सकता है.
फरवरी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की रिपोर्ट में भी इस ओर इशारा किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-कुकिंग और बायोगैस का प्रयोग करके भारत 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर 2 लाख करोड़ रुपए यानी 24 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत कर सकता है.
एलपीजी के आयात पर निर्भरता कम होगी
भारत एलपीजी की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई बाधित होने से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की चिंता बढ़ गई है। अगर एथेनॉल को घरेलू रसोई पकाने के ईंधन के रूप में अपनाया जाता है, तो इससे एलजीपी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

