नई दिल्ली, 19 मई (ता)। भारतीय वायुसेना अपने पायलटों और सैन्य कमांडरों को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए एक अत्याधुनिक सिमुलेटर खरीदने जा रही है। इस सिस्टम का नाम अग्नि है, जिसका पूरा नाम एयर कॉम्बैट ग्राउंड प्लानिंग एंड नेटवर्क इंटीग्रेटड है। यह मल्टी-डोमेन कॉम्बैट सिमुलेटर राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और अन्य फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों के पायलटों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त युद्ध अभ्यास के लिए भी इस्तेमाल होगा। अग्नि एक बेहद एडवांस ट्रेनिंग सिस्टम है, जो वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों को सिमुलेट करेगी। यह सिस्टम फाइटर जेट्स, ड्रोन और मिसाइलों को एक रीयल-टाइम नेटवर्क पर जोडक़र काम करेगा। इसमें वर्चुअल रियलिटी, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पायलट हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर होने वाले युद्ध का प्रशिक्षण एक साथ ले सकेंगे।
यह पारंपरिक सिंगल-प्लेटफॉर्म सिमुलेटर से कहीं ज्यादा एडवांस्ड होगा। सिस्टम दुश्मन के विमानों को भी सिमुलेट कर सकेगा, जैसे अमरीका के एफ-16, एफ-22 और चीन के जे-10 व जे-11 फाइटर जेट्स। पायलट एक ही स्क्रीन पर सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक करते हुए एयर डिफेंस कंट्रोलर के साथ समन्वय कर सकेंगे। अग्नि सिमुलेटर रात के अंधेरे, कोहरे, बारिश, कम दृश्यता और घने बादलों जैसी चुनौतीपूर्ण मौसम स्थितियों में भी प्रशिक्षण दे सकेगा। इससे पायलट बिना असली जोखिम उठाए वास्तविक युद्ध के लिए तैयार हो सकेंगे। आधुनिक युद्ध अब मल्टी-डोमेन युद्ध (एयर, लैंड सी, साइबर और स्पेस) हो गए हैं। अग्नि सिमुलेटर तीनों सेनाओं को एक नेटवर्क पर जोडक़र संयुक्त अभ्यास की क्षमता बढ़ाएगा। वायुसेना ने इसके लिए आरएफपी (रिक्यूएस्ट फॉर प्रपोजल) जारी कर दिया है। यह सिस्टम भारतीय सशस्त्र बलों की लड़ाकू तैयारियों को नई ऊंचाई देगा। पायलटों को भविष्य के जटिल युद्धों के लिए बेहतर प्रशिक्षित करेगा। यह स्वदेशी और विदेशी तकनीक का बेहतरीन मिश्रण होगा।
सिस्टम में बड़े पैनोरमिक डिस्प्ले लगाए जाएंगे, जिन पर 1000 से ज्यादा हवाई खतरों को एक साथ ट्रैक किया जा सकेगा। इसमें फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन, ट्रांसपोर्ट विमान और मिसाइल शामिल होंगे। अग्रि में सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और राफेल जैसे भारतीय लड़ाकू विमानों के हाई-फिडेलिटी कॉकपिट होंगे। इसके अलावा दुश्मन देशों के एफ-16, एफ-22, चीन के जे-10 और जे-11 जैसे विमानों की भी वर्चुअल कॉपी तैयार की जाएगी, ताकि वास्तविक युद्ध जैसी ट्रेनिंग दी जा सके। सिम्युलेटर में टेकऑफ, तेज मोड़, हथियार दागने और खराब मौसम जैसी परिस्थितियों का भी अनुभव कराया जाएगा। पायलट रात, बारिश, कोहरे और कम दृश्यता में भी मिशन ट्रेनिंग कर सकेंगे।
इसका सबसे एडवांस हिस्सा ग्राउंड बैटल एनवायरमेंट होगा, जिसमें टैंक, मिसाइल बैटरी, राडार, युद्धपोत, पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट कैरियर और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को एक साथ दिखाया जाएगा। इसके अलावा ट्रेनिंग के दौरान इंस्ट्रक्टर रियल टाइम में नए खतरे जोड़ सकेंगे।
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