अपने देश में बढ़ती बीमारियों के चलते अंग प्रत्यारोपण बड़ी मांग बनता जा रहा है जहां तक देखने और सुनने को मिलता है। गुर्दा किडनी और अन्य अंगों के लिए लाखों लाखों रुपये जरुरतमंदों को खर्च करने पड़ते हैं मगर फिर भी मनचाहा अंग आसानी से नहीं मिल पाता इंडियन जनरल मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित खोज रिपोर्ट में २०२३ के आंकड़ों के आधार पर यह दावा किया गया है कि देश में पहला नेत्र प्रत्यारोपण १९४८ में चेन्नई में हुआ था। ९० के दशक के बाद नेत्र प्रत्यरोपण के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की। वर्तमान समय में एक खबर के अनुसार नेत्र प्रत्यारोपण की प्रतिक्षा की सूची समाप्त करने के लिए एक लाख कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए जरूरत है। इस चुनौती से परिपर्ण दौड़ में इसकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास सुनिश्चित करने होंगे बताते चले कि अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर अपने देश में नेत्र बैंक एशिया प्रांत क्षेत्र में सर्वाधिक है भारतीय नेत्र बैंक संघ के अधीन ३९६ नेत्र बैंक हैं जिनमें से २०-२५ ही मानकों को पूरा करते हैं और प्रतिविर्ष इनके द्वारा १०० कार्निया प्रत्यारोपण की जाती है यह दशा सोचनीय है देश में आंखें दान में नहीं मिल पा रही है जबकि अहर क्षेत्र में समाज सेवा करने वाले लोग और नेत्र दान कराने वाली सखिशयत प्रचलित है बताते है कि हालात यह है कि कार्निया दान मिलते हैं तो उनमें से ४० प्रतिशत बेकार हो जाते हैं। मेरा मानना है कि नेत्र दान कराने वाले लोगों को और सक्रियता से लोगों यह विश्वास दिलाना होगा कि नेत्र दान या अंग दान करने से उनके अपने को कोई नुकसान नहीं होता दूसरी ओर सरकार को और केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग को ऐसे उपाय करने की आवश्यकता है कि जो ४० प्रतिशत काम में नहीं आ रहे हैं उस पर रोक लगानी चाहिए। जिनके पास सुविधाएं है उनकों ही अनुमति मिले जो इस व्यवस्था का नहंी बचा सकते उन्हें नहीं हमे एक बात समझनी होगी कि जितना हमारी भारतीय संस्कृति मेें जितना विभिन्न प्रकार से दानों का है उससे ज्यादा नेत्र दान का महत्व है यदि जिसे दिखाई नहीं देता उसे दिखाई देने लगे तो वह सारी सुविधाएं अपने लिए जुटा ही सकता है इसलिए नेत्र दान और अंग दान के लिए प्रेरित करने हेतु प्रमुख लोगों को इस संदर्भ में गोष्ठियां आयोजित करनी चाहिए और बच्चाों की शिक्षा से लेकर अंग दान के लाभ भी बताने चाहिए तो मैं समझता हूं गरीब आदमी जिसे साधन और सुविधा ना होने से यह सहायता नहीं मिल पाती उन्हें भी मिलने लगेगी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- नेत्र व अंग दान को बढ़ावा देने हेतु स्कूलों में दी जाए शिक्षा
- पत्नी को मेरा शव मत छूने देना, मेरी आत्मा भटकती रहे, लिखकर बॉडी बिल्डर ने गोली मारकर दी जान
- कल ई-20 के विरोध में जनता के पत्रों के साथ पीएम आवास तक मार्च करेंगे अरविंद केजरीवाल
- 3,000 अफसरों ने सीएपीएफ कानून को दी चुनौती, शौर्य चक्र विजेताओं सहित पदोन्नति में पिछड़े कैडर अफसर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
- ग्लास्गो के रेस्तरां में भारत के नक्शे से ‘गायब’ ‘पूर्वोत्तर, बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने जताई नाराजगी
- अब 17 से 19 अगस्त तक होंगे यूजी-पीजी प्रथम मेरिट से प्रवेश
- 10 से 15 अगस्त तक तिरंगे के रंग में रंगेगा मेरठ
- रंगोली मंडप पर चला हथौड़ा, 44 सील संपत्तियों के मालिकों के पास एक हफ्ता

