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    Home»देश»डिजिटल अरेस्ट ठगी तो रोकी जानी चाहिए मगर मुआवजा सही नहीं
    देश

    डिजिटल अरेस्ट ठगी तो रोकी जानी चाहिए मगर मुआवजा सही नहीं

    adminBy adminDecember 17, 2025No Comments20 Views
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    सरकार द्वारा डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों की मदद करने और उन्हें इस प्रकार की ठगी से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं ऐसा इस बारे में आए दिन पढ़ने को मिलने वाली खबरों से पता चलता है। यह भी सही है कि संचार के आधुनिक युग में तकनीकी अपनाकर इस प्रकार की धोखाधड़ी करने वाले निरंतर सक्रिय हो रहे हैं और बताते हैं कि देश के एक जिले में यह कार्य बहुत तेजी से चलता बताया जाता है। कुल मिलाकर देखें तो यह समस्या निरंतर विकराल होती जा रही है जिसे जनहित में रोका जाना सबसे जरूरी नजर आता है। क्योंकि कई तो अपनी जीवनभर की कमाई इन ठगों के हाथों गंवा देते हैं।
    लेकिन इस सबके बावजूद भी मैं सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई के फैसले या सुझाव पर तो कोई टिप्पणी नहीं कर रहा मगर लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार दिया गया है उसे ध्यान में रखते हुए यह जरूर कहना चाहता हूं कि डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने के बिंदु पर कोई विचार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि एक तो वैसे ही अनेको प्रकार के दिए जाने वाले मुआवजे या अन्य कारणों से आम आदमी आर्थिक परेशानी महसूस कर रहा है। दूसरे अगर इस मामले में मुआवजे की सोच आगे बढ़ी तो ठगे जाने वाले भी लापरवाह हो सकते हैँ और ठगने वाले सक्रिय। इस व्यवस्था को रोकने के लिए सक्रियता की बात है तो इस स्तर पर वर्तमान में चल रही है। शायद भविष्य में अभी इससे ज्यादा और सक्रियता उनके लिए दिखा पाना संभव नहीं है। लोगों को ठगे जाने से रोका जाना भी जरूरी है मगर मुआवजा समय अनुकूल नहीं लगता क्येांकि अगर ऐसा हुआ तो और कई बिंदु निकलकर आएंगे जो इससे भी ज्यादा पीड़ितों के लिए मुआवजा सुनिश्चित कराने के लिए जोर दे सकते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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