लखनऊ 25 अप्रैल। अब भू-उपयोग, लोकेशन और भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर विकास शुल्क कम या ज्यादा देना होगा। नगरीय निकाय क्षेत्र बड़े व्यावसायिक भूखंडों के मामले में जहां मौजूदा दर से 10 प्रतिशत ज्यादा वहीं निकाय क्षेत्र के बाहर 20 प्रतिशत कम शुल्क देना होगा। इसी तरह औद्योगिक उपयोग पर 60 प्रतिशत तक कम विकास शुल्क अब लगेगा। निकाय क्षेत्र के बाहर ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर भी अब कम विकास शुल्क लगेगा। ऐसे में परियोजना की कुल लागत कम होने से फ्लैट आदि की कीमत घट सकती है। विकास शुल्क घटने से अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
अभी तक विकास शुल्क की दर आवासीय व्यावसायिक, औद्योगिक या कृषि भू-उपयोग होने और शहरी क्षेत्र से लेकर निकाय क्षेत्र के बाहर एक समान ही था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विकास शुल्क की दरों को भू-उपयोग और लोकेशन के अनुसार व्यावहारिक बनाते हुए आवास एवं शहरी नियोजन के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद ने शुक्रवार को उम्र नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उहण एवं संग्रहण) (तृतीय संशोधन) नियमावली- 2026 संबंधी अधिसूचना जारी कर दी। संशोधित नियमावली के अनुसार अब स्थान (नगर निकाय सीमा के अंदर या बाहर), भू उपयोग, विकास की स्थिति और भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर विकास शुल्क की दर कम या ज्यादा होगी। कृषि एवं औद्योगिक उपयोग की भूमि पर विकास शुल्क, आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की तुलना में कम होगी। इसी तरह नगर निकाय की सीमा के भीतर और उससे बाहर की भूमि पर भी शुल्क की दरों में अब बड़ा अंतर रहेगा। अब 100 वर्गमीटर के आवासीय भूखंड के मामले में विकास शुल्क निकाय सीमा में 50 प्रतिशत कम देना होगा। इसी तरह निकाय सीमा के बाहर ग्रुप हाउसिंग पर 28 प्रतिशत कम शुल्क लगेगा। 30 वर्गमीटर वाले व्यावसायिक भूखंड पर 60 प्रतिशत कम विकास शुल्क देना होगा।
शोधित व्यवस्था में सर्वाधिक फायदा औद्योगिक उपयोग के मामले में होगा क्योंकि शहरी सीमा में 45 और निकाय सीमा के बाहर 60 की कमी विकास शुल्क में आएगी। कृषि भूमि उपयोग के तहत निकाय सीमा में 34 और उससे बाहर 38 प्रतिशत विकास शुल्क घटेगा। चूंकि अभी ज्यादा शुल्क होने से बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण कराया जा रहा है इसलिए माना जा रहा है कि शुल्क घटने से मानचित्र पास कराए जाने से अनियोजित विकास रुकेगा और प्राधिकरणों की आय बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण परिषद की योजनाओं के बाहर निर्माण के मानचित्र पास कराने पर विकास शुल्क वसूला जाता है। विकास शुल्क की धनराशि का उपयोग सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, स्टार्म वाटर ड्रेनेज, बिजली व अन्य बुनियादी जनसुविधाओं के विकास में किया जाता है।
विकास शुल्क की दर (रुपये प्रति वर्गमीटर)
गाजियाबाद – 4165 रुपये
लखनऊ, कानपुर आगरा- 2462 रुपये
वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, मुरादाबाद, गजरौला, बरेली, लोनी, मोदीनगर व मुरादनगर 1450 रुपये
अलीगढ़, गोरखपुर, बुलंदशहर सिकंदराबाद, खुर्जा मुजफ्फरनगर, शामली, खलौती हापुड़ – पिलखुवा, बागपत – बड़ौत- खेकड़ा, फिरोजाबाद-शिकोहाबाद उन्नाव- शुक्लागंज, पं. दीनदयालनगर 1020 रुपये
अयोध्या, रायबरेली, बांदा रामपुर, उरई, आजमगढ़ बस्ती, मीरजापुर, बिटूर अकबरपुर – माती, फतेहपुर सीकरी, कोसीकला- छाता- चौमुहानंदगांव, गोवर्धन- राधाकुंड, गढ़मुक्तेश्वर जहांगीराबाद, शिकारपुर शाहजहांपुर 603 रुपये

