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    Home»न्यूज़»डिप्टी सीएम केशव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की तारीफ
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    डिप्टी सीएम केशव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की तारीफ

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 24, 2026No Comments4 Views
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    प्रयागराज, 24 जनवरी। संगम की रेती पर आयोजित हो रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को कहा कि मामले का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। इसका मतलब वह (डिप्टी सीएम) यह मानते हैं कि उनके अधिकारियों से कुछ गलती हो गई है। उनका यह समझदारी भरा बयान है। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक सही सच सामने रखी है।
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी को ऐसे ही समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनना चाहिए था। तो प्रदेश के लिए भी यह अच्छा होता। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेले के चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी पर सोमवार को स्नान नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह मौनी अमावस्या पर शिविर से संगम स्नान के लिए निकले थे लेकिन प्रशासन द्वारा गंगा स्नान से रोके जाने के बाद अभी तक उनके लिए मौनी अमावस्या का मुहूर्त चल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस विवाद के पटाक्षेप को लेकर कहा कि इसकी शुरुआत मेला प्रशासन ने की है लेकिन अब तक मेला प्रशासन ने कोई संपर्क नहीं किया है।
    संगम तट पर माघ मेले के दौरान पालकी विवाद को लेकर धरने पर बैठे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रदेश की सत्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य की कमान किसी अकड़ वाले व्यक्ति के बजाय केशव मौर्य जैसे समझदार व्यक्ति के हाथ में होनी चाहिए। शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने शंकराचार्य के साथ हुई घटना पर कार्रवाई की बात कही थी।
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा डिप्टी सीएम समझदार हैं। वह समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई है और मामले को बढ़ाना नहीं चाहिए। उन्हें पता है कि इससे पार्टी का नुकसान हो रहा है। ऐसे ही समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। जो जिद पालकर बैठा हो या जिसके मन में बदले की भावना हो उसे मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहिए।
    शंकराचार्य ने आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर स्नान नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें ससम्मान संगम में स्नान नहीं कराया जाता, तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। उन्होंने कहा कि पालकी शंकराचार्य की परंपरा है और मुगल काल में भी पेशवाओं ने पालकी के साथ ही शंकराचार्य का स्नान सुनिश्चित कराया था। प्रशासन द्वारा इसे नई परंपरा कहना सफेद झूठ है।
    विपक्षी दलों के नेताओं के उनसे मिलने पहुंचने पर हो रही राजनीति पर शंकराचार्य ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा क्यों नहीं आई? अगर विपक्षी दल आ रहे हैं तो भाजपा क्यों नहीं आ रही? भाजपा तो खुद को हिंदू पार्टी कहती है, फिर शंकराचार्य, दंडी सन्यासियों और बटुकों के अपमान पर वह चुप क्यों है? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर भाजपा यह मानती है कि वह जो कर दे वही सही है, तो जनता तय करेगी कि ऐसी सोच वालों को आगे मौका देना है या नहीं।
    संगम की बर्फीली हवाओं के बीच खुले में धरने पर बैठने के कारण शंकराचार्य की तबीयत भी बिगड़ गई है और उन्हें बुखार है। इसके बावजूद उन्होंने साफ कर दिया है कि वह अपनी टेक (संकल्प) से पीछे नहीं हटेंगे। उनकी मांग है कि प्रशासन अपनी गलती माने और उन्हें ससम्मान पालकी के साथ स्नान कराए।

    Deputy CM Keshav Prasad prayagraj Shankaracharya Avimukteshwaranand tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
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