नई दिल्ली, 01 जुलाई (ता)। अभिनेता सलमान खान की तरफ से फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ के प्रमोशन और रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर आज बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। सुनवाई से पहले फिल्म के निर्माता अमित जानी ने सलमान खान की याचिका का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा और कई कानूनी व तथ्यात्मक दलीलें पेश की हैं। उनका कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत केवल कानून तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही फैसला करेगी।
एक से बातचीत में अमित जानी ने दावा किया कि पिछली सुनवाई के दौरान सलमान खान के वकील ने फिल्म पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी लेकिन अदालत ने पहले दूसरे पक्ष को सुनने की बात कही। जानी के अनुसार, सुनवाई 19 तारीख को निर्धारित थी जबकि उन्हें याचिका की कॉपी सिर्फ दो दिन पहले ईमेल के जरिए से भेजी गई। उनका कहना है कि इससे उन्हें अपनी कानूनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका।
अमित जानी ने आरोप लगाया कि जिस व्हाट्सएप नंबर से उन्हें याचिका भेजी गई थी, उसी नंबर से उन्हें शहजाद भट्टी नामक व्यक्ति का फोन आया। जानी का दावा है कि कॉल करने वाले ने सलमान खान के साथ समझौता कराने और बैठक करने का दबाव बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें फिल्म में लगाए गए निवेश का मुआवजा देने की पेशकश की गई और इनकार करने पर उनके तथा उनके परिवार को बम या ड्रोन हमले की धमकी दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सलमान खान के नाम का व्यावसायिक लाभ उठाने के आरोपों को खारिज करते हुए अमित जानी ने कहा कि उनकी फिल्म का मुख्य विषय बिश्नोई समुदाय का करीब दो दशक लंबा संघर्ष, वन्यजीव संरक्षण, प्रकृति के प्रति समर्पण और काले हिरण के प्रति समुदाय की आस्था है। उन्होंने कहा कि सलमान खान फिल्म के नायक नहीं हैं और इसका उद्देश्य किसी अभिनेता की लोकप्रियता का लाभ उठाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक और ऐतिहासिक विषय को दर्शकों के सामने लाना है। पर्सनैलिटी राइट्स के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म में अयान खान का किरदार निभाने वाले अभिनेता काशिफ इकबाल खान को सलमान खान जैसा दिखाने के लिए किसी विशेष मेकअप, प्रोस्थेटिक्स या तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
निर्माता ने यह भी कहा कि फिल्मों की सामग्री की जांच और प्रमाणन का अधिकार केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास है। उनके अनुसार, यदि किसी फिल्म की रिलीज से पहले अदालतें उसकी सामग्री की समीक्षा करने लगें, तो यह ‘न्यायिक सेंसरशिप’ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे फिल्म निर्माण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से इस पहलू पर भी विचार करने की अपील की है।
अमित जानी ने दावा किया कि उन्हें शहजाद भट्टी, रोहित गोदारा और डी-कंपनी के नाम पर लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनकी टीम फिल्म की रिलीज की तैयारियों में जुटी हुई है और योजना के अनुसार इसे दुनियाभर में 7,000 से 8,000 स्क्रीन पर रिलीज करने का लक्ष्य रखा गया है। अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हुई है।
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