नई दिल्ली, 23 अप्रैल (ता)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक यूट्यूबर को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल अदालतों की गरिमा पर हमले के लिए नहीं किया जा सकता। मामला फाइट 4 ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड वीडियो से जुड़ा है, जिनमें जजों व न्यायिक व्यवस्था पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
अदालत ने कहा कि यह सामग्री वास्तविक आलोचना नहीं, बल्कि न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक सुधारों पर सवाल उठाना लोकतंत्र में स्वीकार्य है, लेकिन जिस तरह से वीडियो में जजों को निशाना बनाया गया, उत्तेजक भाषा का इस्तेमाल हुआ और आरोप लगाए गए वह स्वस्थ आलोचना की सीमा से बाहर है। अदालत ने कहा कि तथ्यहीन आरोप, जजों की मंशा पर सवाल उठाना और संस्थान को भ्रष्ट या पक्षपाती कहना सीधे न्यायपालिका की विश्वसनीयता को कमजोर करता है और यह आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है।
सुनवाई के दौरान वीडियो में शामिल दो वकीलों ने बिना शर्त माफी मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दे दी। हालांकि, यूट्यूबर ने अपने कृत्य को जनहित में कहा, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री का उद्देश्य सनसनी फैलाना और जनता का भरोसा कमजोर करना था। कोर्ट ने दोहराया कि अवमानना कानून जजों की व्यक्तिगत छवि नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास की रक्षा के लिए है।
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