नई दिल्ली 04 अप्रैल। आने वाले समय में बैंक बदलना उतना ही आसान हो सकता है, जितना मोबाइल नंबर पोर्ट करना। आरबीआई ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसमें ग्राहक बैंक बदल सकेंगे लेकिन उनका खाता नंबर नहीं बदलेगा। यह योजना आरबीआई के ‘पेमेंट्स विजन 2028’ का हिस्सा है और इसे लागू करने के लिए एक नया केंद्रीय सिस्टम बनाया जाएगा।
अभी समस्या यह है कि अगर कोई व्यक्ति बैंक बदलता है, तो उसकी खाता संख्या बदल जाती है। इसके बाद उसे अपनी नई बैंक जानकारी वेतन, किस्त, म्यूचुअल फंड, बीमा, गैस सब्सिडी, बिजली बिल और अन्य जगहों पर अपडेट करनी पड़ती है।
ऐसे काम करेगी यह प्रणाली
इस नई व्यवस्था में मौजूदा बैंक खाता स्थायी पहचान संख्या की तरह काम करेगा। जब आप बैंक बदलेंगे, तो नया बैंक उसी संख्या को अपने सिस्टम से जोड़ देगा।
इसके लिए रिजर्व बैंक ‘भुगतान स्विचिंग सेवा’ नाम का एक केंद्रीय मंच बना रहा है जिसमें ग्राहक के सभी ऑटो पेमेंट, किस्त, निवेश योजना और बिल भुगतान के निर्देश सुरक्षित रहेंगे और बैंक बदलते ही ये अपने-आप नए बैंक में स्थानांतरित हो जाएंगे।
चरणों में होगा लागू
आरबीआई ने अभी इस सुविधा को लागू करने की तारीख घोषित नहीं की है। पहले सभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम को जोड़ना होगा, सुरक्षा सिस्टम बनाना होगा और नियम तैयार करने होंगे। इसलिए यह सुविधा चरणों में लागू हो सकती है।
इस व्यवस्था से ग्राहकों को क्या फायदा होगा
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे आसानी से बैंक बदल सकेंगे। अगर किसी बैंक की सेवा खराब है या ज्यादा शुल्क लग रहा है, तो ग्राहक तुरंत बैंक बदल सकेंगे। इससे बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बैंक ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की कोशिश करेंगे।
किस्त और बिल भुगतान की समस्या नहीं होगी
अभी बैंक बदलते समय सबसे बड़ी परेशानी किस्त और स्वतः भुगतान को लेकर होती है। कई बार बैंक बदलने के बाद किस्त कटना बंद हो जाता है या बिल भुगतान रुक जाता है। नई व्यवस्था में यह समस्या नहीं होगी, क्योंकि सभी स्वतः भुगतान अपने-आप नए बैंक में स्थानांतरित हो जाएंगे।

