नई दिल्ली, 21 जुलाई (ता)। न्याय के मंदिर में जब कानून के ज्ञाताओं की साख पर सवाल उठे, तो सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख अख्तियार करना स्वाभाविक है। कोर्ट ने देश में लॉ कालेजों की गिरती गुणवत्ता और बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ ) के दोहरे रवैये पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। इसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैराज जैसी जगहों से चलने वाले ला कालेजों को बीसीआइ द्वारा मान्यता देना बेहद चिंताजनक विषय है।
यह मामला 50 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट के. आर. सुदर्शन से जुड़ा है, जिन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की है। उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित होने के कारण तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने वकील के रूप में उनका नामांकन रोक दिया। जब बीसीआइ के वकील ने इस मामले में श्व्यापक चिंताश् की बात कही, तो जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता व जस्टिस आर. महादेवन की पीठ भड़क गई। पीठ ने बीसीआइ के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि काउंसिल एक तरफ आपराधिक मामलों के दोषियों को नामांकन दे रही है, वहीं दूसरी तरफ लंबित मामलों वाले योग्य उम्मीदवारों का रास्ता रोक रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि देश में गंभीर अपराधों के दोषियों तक का नामांकन हुआ है, जबकि याचिकाकर्ता पर महज एक कंपनी को सलाह देने का आरोप है।
Trending
- बारिश से भरभरा कर गिरी मकान की छत, मलबे में दबकर वृद्धा की मौत, दो घायल
- फार्मा कंपनियों पर केस, जब्त की कोडीन सीरप की 5,050 बोतलें
- BEYOND THE BARRICADES: THE ‘MANTAR’ OF HARMONY AT JANTAR MANTAR
- राज्य सरकार पूरे प्रदेश में अपराएगी गोमूत्र डेरी का माडल
- उड़ान योजना को गति देने को 100 नए एयरपोर्ट बनेंगे
- शंकर शर्मा ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की
- यूपी के ‘दो लड़कों’ को आकाश आनंद ने बताया अंकल
- जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का समय मांगेगा

