कानून व्यवस्था में सुधार और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई एवं महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के दावों के विपरीत मीडिया में जो खबरें पढ़ने को मिल रही हैं कि शोहदों की छेडछाड़ से तंग होकर छात्राओं ने स्कूल छोड़ा और फोन नंबर ना देने पर तेजाब फेंकने की धमकी आदि के चलते जो नारी जाति की सुरक्षा को लेकर जो माहौल बना हुआ है उसने हर नागरिक और बेटी वालों केा मानसिक रूप से परेशान करके रख दिया है। अभी लोग उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकित भंडारी हत्याकांड को नहीं भूल पाए हैं कि मेरठ के सरधना क्षेत्र के ग्राम कपसाड़ में बीती आठ जनवरी को अपनी बेटी के साथ खेत में जा रही अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या कर दी गई और बेटी का अपहरण कर लिया गया। घटना को लेकर हमेशा की भांति बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय राय और भाजपा के प्रभारी मंत्री धर्मपाल द्वारा मामले की निंदा करते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान को गांव में जाने से रोका गया। तो वो धरना देकर बैठ गए। पूर्व विधायक संगीत सोम का कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी कि सात पीढ़ियां भी नहीं भूलेंगी। वर्तमान समय में क्षेत्र में ज्यादातर पुलिसफोर्स राजनीतिक दलों के नेताओं को ना देने जाने के लिए लगी हुई है तो एसएसपी डॉ विपिन ताड़ा का दावा है कि लड़की की बरामदगी के लिए कई टीमें अधिकारियों के नेतृत्व में गठित की गई है लेकिन घटना के आज तीसरे दिन भी लड़की का पता ना चलना सोचनीय विषय तो है ही। कार्रवाई पर भी सवाल उठाता है और संवेदनशील नागरिकों में इस घटना को लेकर रोष भी व्याप्त है। आज आसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के मौके पर पहुंचने को लेकर जिम्मेदारों के हाथ पांव सुबह से ही फूले हुए थे।
सवाल यह उठता है कि नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने से अपहृत की गई युवती को बरामद नहीं होगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पक्ष विपक्ष के नेताओं को वहां जाने दिया जाना चाहिए क्योंकि अगर पीड़ित परिवार को यह अहसास नहीं होगा कि सब उसके साथ हैं तो स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ सकती है। पांच बार के ना नुकर के बाद बलकटी से मारी गई सुनीता जो अपह़त युवती की मां है का अंतिम संस्कार तो हो गया। लेकिन उस समय बड़ा हृदय विदारक दृश्य नजर आ रहा था जब परिवार के लोग रो रोकर आग्रह कर रहे थे कि साहब बेटी को बरामद कर एक बार उसकी मां के दर्शन तो उसे करा दीजिए। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में सिर और नाक पर धारदार हथियारों के वार से मौत की पुष्टि हुई है। कुल मिलाकर पक्ष विपक्ष के नेताओं की सांत्वना और घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कपसाड़ और आसपास के क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से छावनी बने नजर आ रहे हैं। महिलाओं ने मौजूद अधिकारियों को यह कहकर उन्हें सही स्थिति का ज्ञान कराने की कोशिश की कि इंसाफ नहीं दिला सकते तो चूड़िया ही पहन लो। परिजनों के साथ ही नागरिकों का भी कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं कार्रवाई चाहिए। इस मामले को लेकर कपसाड़ और सरधना के बाहर भी अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी और महिलाओं को सुरक्षा का इंतजाम कराने की मांग को लेकर मेरठ कमिश्नरी पर धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। पथिक सेना के अध्यक्ष मुखिया गुर्जर ने सवाल उठाया कि क्या हत्यारों का एनकाउंटर होगा। आज उक्त लाइन लिखे जाने तक अपहृत रूबी की बरामदगी की खबर कहीं से प्राप्त नहीं हो पाई थी। आखिर अपहरणकर्ता हत्यारों को जमीन निगल गई या वो आसमान में गुम हो गया आखिर मामला क्या है कि अभी तक तीसरे दिन भी उसके बारे में कोई खबर क्यों नहीं है। आखिर पुलिस की मुखबिर व्यवस्था बिल्कुल ही ठप हो गई है क्या क्योंकि पूर्व में अपराधी या उसमें संलिप्त कितने ही असरदार क्यों ना हो मुखबिर उनके सुराग ढूंढ ही लेते थे। पुलिस ने अभी तक मुखबिरों के माध्यम से घटना का पता लगाने का प्रयास क्यों नहीं किया।
जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह, कपसाड़ के साथ साथ सरधना की आसपास की स्थिति पर पूरी तौर पर नजर लगाए हुए हैं और उच्चाधिकारियों व शासन सहित सीएम को यहां की स्थिति से अवगत कराने के साथ ही आरोपितों को पकड़वाने का प्रयास भी कर रहे बताए जाते हैं।
जब भी ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाएं होती हैं तो पीड़ित परिवार के अलावा अन्य को अंदर तक कंपकंपा देती है क्येांकि आज इस बेटी के साथ कुछ हुआ तो कल हमारे परिवार की बेटी के साथ ना हो लेकिन जहां तक दिखाई देता है जब ऐसी घटनाएं होती है तो दो तीन दिन तो खूब हंगामा और चर्चा होती है और धीरे धीरे लोग और बड़े दावे करने वाले दूसरें मामलों में उलझकर रह जाते हैं। ऐसे प्रकरणों में लीपापोती और राजनीति ना करके हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि सबसे पहले अपहृत बेटी की बरामदगी हो और हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार हर हाल में गांव देहातों से लेकर जिला मुख्यालयों पर ऐसी व्यवस्था करे कि दोबारा ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो पाए। दूसरे किसी मुआवजे या संवेदना या सांत्वना दे ना तो दुख कम होता है और ना ही जो परिवार का चला गया वो वापस आ सकता है। बेटी और परिवार को जो कष्ट से गुजरना पड़ रहा है उसकी भी वापसी नहीं हो सकती। यह घटना इस अनुसूचित जाति के परिवार के लिए किसी व्रजपात से कम नहीं है। इसलिए मुझे लगता है कि दुखी परिवार के लिए कुछ ठोस ऐसी व्यवस्थाएं भी की जाएं कि जो भविष्य में अन्य समस्याओं का समाधान होता रहे। इसके लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सबसे पहले लड़की की बरामदगी और हत्यारों को सजा व साथ ही परिवार को कम से कम दो करोड़ का मुआवजा एक सदस्य को सरकारी नौकरी और सुरक्षा के इंतजाम उपलब्ध कराए जाएं। और दुस्साहसिक अपराध करने वाले पारस सोम को सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम के कहे अनुसार ऐसी सजा दी जाए कि उसकी सात पुश्ते भी याद रखें। मेरा प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने आग्रह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने स्तर पर हर तरह की व्यवस्थाएं करने के लिए आप भी जनपद में कुछ ऐसी व्यवस्थाएं कराईये कि बहन बेटी सुरक्षित रहे उनका उत्पीड़न ना हो और वो मुख्यमंत्री के अनुसार बेखौफ होकर कहीं भी आ जा सके और उनके परिवार को डर का सामना भी ना करना पड़े।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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