
मेरठ, 06 मई (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। अपने गांव में दो कहावत बड़ी मशहूर थीं चोट्टी कुतिया जलेबियों की रखवाली और बाढ़ ही खेत को खा गयी अगर ध्यान से देखें तो शहर में कुछ अवैध निर्माण कर्ताओं को और इससे संबंध मेडा के अधिकारियों तथा आर्किटेक्ट की मिलीभगत से जो मानचित्र पास के नाम पर अवैध निर्माण हो रहे हैं उन पर सही उतरती है। स्मरण रहे कि जब मेडा वीसी या मंडलायुक्त जी की अध्यक्षता में मेरठ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में नगर के सुनियोजित विकास और सौंदर्यकरण को लेकर बैठक होती है तो उनमें बिल्डरों के साथ-साथ सम्मानित आकेटैक्ट को भी बुलाया जाता है और सब मिलकर जो मंथन करते हैं खबरों के अनुसार उसकी जो तस्वीर उभरकर आती है उससे ऐसा लगता है कि कुछ ही दिनों में अपना शहर दुनिया के सबसे अच्छे महानगरों में हो जाएगा चौड़ी-चौड़ी सड़कें होगी साफ सफाई महत्वपूर्ण होगी और अवैध निर्माणों पर पूरी तौर पर रोक लगेगी।
लेकिन शहर में आजकल बच्चा पार्क से बेगमपुल की ओर आते हुए रघुनाथ कॉलेज और शिव चौक की ओर जो सड़क मुड़ती है उसके कोने पर मेडा से अपूर्वड के नाम पर आकाश गंगा से संबंध किसी प्रवीण मित्तल नाम के व्यक्ति द्वारा सरकार की निर्माणनीति के बिल्कुल विपरीत और सुनियोजित विकास और सौंदर्यकरण की योजना में पलीता लगाने में सक्षम बनीं बिल्डिंग को देखा जा सकता हैं। बताते हैं कि एक बार इसमें सील भी लगी फिर गायब हो गयी कुछ सुधार तो हुआ नहीं इसलिए पक्का है कि अवैध रूप से तोड़ी गयी जो भी हो आजकल यह बिल्डिंग अवैध रूप से बने कॉम्पलैक्स के रूप में तो चर्चित है ही और इस पर लगे एक बोर्ड के लिए भी चर्चित है जिस पर लिखा है कि यह निर्माण मेडा के वीसी अर्थोर्टी श्री अभिषेक पांडे के द्वारा स्वीकृत मानचित्र के अनुसार बनी है नीचे आर्किटेक्ट अंकित अग्रवाल का नाम लिखा है। यह बोर्ड किसने लगाया और क्यों लगाया यह तो संबंधित ही जान सकते हैं लेकिन एक बात जो नागरिकों में चर्चा है वह यह है कि इसमें पूर्व वीसी का नाम लिखकर एक सीनियर आईएएस अधिकारी अभिषेक पांडे को जबकि इससे इसका कोई मतलब ही नहीं है अब वह वीसी भी नहीं है उनका नाम छापकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश बताया जा रहा है क्योंकि हमेशा मानचित्र के अनुसार बिल्डिंग बने या उसके विपरीत उस पर लिखा रहता है कि मेडा से पास मानचित्र लेकिन इस बोर्ड पर पूर्व वीसी अभिषेक पांडे का नाम क्यों लिखा गया है वह एक ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले अधिकारी थे और अंकित अग्रवाल जो आर्किटेक्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी बताये जाते हैं अगर उनकी बिना अनुमति के उक्त नाम लिखा गया तो यह उनकी प्रतिष्ठा खराब करने की साजिश भी कह सकते हैं अगर उनकी अनुमति से नहीं लिखा गया तो नागरिकों के अनुसार एक प्रतिष्ठित आर्किटैेक्ट को भी बदनाम करने का प्रयास हो सकता है क्योंकि उक्त बिल्डिंग शासन की निर्माण नीति के अनुसार तो बिलकुल ही नहीं है और जिस परिस्थिति में यह खड़ी है उसका नक्शा मेडा के अनुसार नहीं किया जा सकता आसपास के लोगों का कहना है कि निर्माणकर्ता ने मेडा से पास मानचित्र कभी नहीं लगाया जिसमें किस चिज का नक्शा पास है और क्या बन रहा है और तो और सड़क से जो पर्किंग आदि के लिए लगभग साढ़े बारह फुट जगह छोड़ी जानी चाहिए वह भी और जितनी जमीन में निर्माण होना है उसका कुछ हिस्सा हवा पानी के लिए छोड़ा जाता है वह भी नहीं छोड़ा गया। हां अब इस प्रकार के बोर्ड लगाकर अपना व्यापार खोलने वाले सीधे सच्चे लोगों को जनमानस की भाषा में बिल्डर द्वारा ठगने और अधिकारी एर्थोर्टी को बदनाम करने की कोशिश हो रही बताई जाती है एक सवाल माननीय मुख्यमंत्री जी सुरसा की भांति मुंह बाये खड़ा है इतना सब होने के बावजूद भी मेडा के अवैध निर्माण रोकने से संबंध एई और जेई इस ओर क्यों आंखे मीचे बैठे है और वह क्या बात है जो इन्हें कार्यवाही करने से रोक रही है इसकी जांच भी होना आवश्यक बताया जाता है।

