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    Home»देश»किसानों के ही नहीं सर्वमान्य नेता थे चौधरी चरण सिंह, वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच के समर्थन में रहे
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    किसानों के ही नहीं सर्वमान्य नेता थे चौधरी चरण सिंह, वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच के समर्थन में रहे

    adminBy adminDecember 24, 2025No Comments10 Views
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    देश के पूर्व प्रधानमंत्री रालोद संस्थापक केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के दादा चौधरी चरण सिंह की जयंती गत दिवस पूरे देश में प्रशंसकों द्वारा मनाई गई। यह चौधरी साहब के प्रति आम आदमी का प्यार और सम्मान कह सकते हेैं कि सुबह से ही उनकी प्रतिमाओं की सफाई कर दूध से नहलाया गया और हवन पूजन व माल्यार्पण कर पुष्पांजलि दी गई। चौधरी चरण सिंह देश की राजनीति में सर्वमान्य नेता रहे। उनके द्वारा सिद्धांतों और आदर्शों की राजनीति को बढ़ावा दिया गया। राजनीतिक जीवन में चौधरी चरण सिंह पर कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं रहा। वह पाक साफ दामन वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे। उनका व्यक्तित्व वटवृक्ष के समान था जहां सबको आगे बढ़ने और काम करने का मौका मिलता था। यह सही है कि किसान परिवार में जन्में चौधरी चरण सिंह का किसानों से विशेष लगाव और उनकी तरक्की के बारे में सोचने की बात महत्वपूर्ण थी लेकिन उनके द्वारा हर व्यक्ति के प्रति सेवा भाव की जो नीति अपनाई जाती थी वो अपने आप में उल्लेखनीय थी और सबसे बड़ी बात चौधरी चरण सिंह साहब एक ऐसे नेता थे जो राजनीति में सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे और निर्णय लेने में उनके द्वारा देर नहीं लगाई जाती थी। यह उनसे परिचित हर व्यक्ति जानता है। चौधरी चरण सिंह जितना किसानों के लिए करते थे उतना ही उनके दिल में मजदूर असहायो और गरीबों के लिए भी प्यार बसा था। इसलिए उन्हें सिर्फ किसान नेता कहना मुझे लगता है सही नहीं है। वो सर्वमान्य नेता थे और आज भी उनकी पहचान उनकी पहचान आम आदमी में इसी रूप में होती है। उन पर कई बार किसी जाति को लेकर चर्चा शुरू होती है मगर ऐसा करने वाले यह नहीं जानते थे कि उन्होंने सबसे पहले अपनी पार्टी का कोषाध्यक्ष एक वैश्य परिवार के प्रमुख को बनाया और उन्हें राज्यसभा भी दी गई अपनी जाति वाले को नहीं। कुल मिलाकर यह कहने में कोई हर्ज महसूस नहीं करता हूं कि जो एक नारा लगाया जाता है कि जब तक सूरज चांद रहेगा चौधरी चरण सिंह का नाम रहेगा वो इस पर पूरी तौर पर खरे उतरते हैं। कहने लिखने को तो चौधरी चरण सिंह पर पूरे ग्रंथ लिखे जा सकते हैं लेकिन उनकी ईमानदारी और अच्छी मंशा के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन मन चंगा तो कठौती में गंगा या उनके बारे में जितना भी कह ले वो सूर्य को दीपक दिखाने के समान ही होगा इसलिए मेरा उनके अनुयायिायों से आग्रह है कि वो जब भी कहीं बोले तो उन्हें सिर्फ किसान नेता ना बताएं वो सर्वसमाज के नेता थे और उनकी यादें इसी रूप में होनी चाहिए। बड़ी ताज्जुब की बात है कि वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच के वो हमेशा समर्थक रहे और यहां के नागरिकों को वो तोहफा भी देना चाहते थे अगर लोकसभा में विश्वास मत का मुददा नहीं आता तो अब तक वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना हो चुकी होती। यह मुददा भी रालोद नेताओं को जनता के सामने लाना चाहिए यह वक्त की सबसे बड़ी मांग कही जा सकती है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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