वाराणसी 09 मार्च। वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक आदिशक्ति की आराधना, उपासना व साधना सिद्धियों का महापर्व वासंतिक नवरात्र पर्व 19 मार्च से आरंभ होगा। उस दिन उदयातिथि में चैत्र कृष्ण अमावस्या होने के कारण प्रतिपदा का क्षय होते हुए भी पूरे दिन प्रतिपदा मिलने से घर-घर में कलश स्थापना होगी तथा देवी शक्ति की आराधना का यह महापर्व पूर्ण नौ दिवसीय होगा। श्रीराम नवमी 27 मार्च को होगी, उसी दिन व्रत की पूर्णाहुति के साथ भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव सनातन धर्मावलंबी मनाएंगे। ज्योतिर्विद आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार माताजी का आगमन पालकी पर होगा। मां गज वाहन से प्रस्थान करेंगी जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष, श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 6:41 बजे तक रहेगी। इसके बाद ही प्रतिपदा लग जाएगी जो 20 मार्च को प्रातः सूर्योदय के पूर्व 5:30 बजे तक पूर्ण हो जाएगी। इसलिए वासंतिक नवरात्र व्रत का आरंभ 19 मार्च से ही होगा तथा इसी दिन भगवती के पूजन के निमित्त घरों/ मंदिरों में कलश स्थापन-पूजन इत्यादि किया जाएगा। हवन पूजन के साथ पूर्णाहुति 27 मार्च को मध्याह्न 12:27 तक हो सकेगी।
इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग न होने के कारण प्रातःकाल से आरंभ कर दोपहर 12:25 तक कलश स्थापन शुभ होगा। किसी कारणवश जो लोग उक्त काल में कलश स्थापन न कर सकें, वे इसके बाद भी रात्रि पर्यंत कलश स्थापन कर सकते हैं। बीएचयू के ही प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि महाअष्टमी व्रत 26 मार्च गुरुवार को किया जाएगा और पारण 27 को होगा। महानवमी का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा तथा पारण 28 मार्च को प्रातः 10:30 तक हो सकेगा।

