इलाहाबाद, 24 फरवरी। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रतिबंध के बावजूद चीन से खतरनाक लहसुन जैसी चीजों के धड़ल्ले से देश में आने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को 26 व 27 सितंबर 2024 को दिए गए विस्तृत आदेशों के तहत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया।
याची ने कहा वर्ष 2014 से ही खतरनाक रसायनों से युक्त इस लहसुन की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बाजारों में चीन से आने वाला लहसुन खुले आम बिक रहा है। हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 को दिए आदेश में प्रदेश के खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के डीएम को कार्रवाई का आदेश दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के डीएम हेल्पलाइन नंबर जारी करें जिससे लोग चीन के लहसुन की बिक्री की शिकायत कर सकें। कोर्ट ने शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। बीती 20 फरवरी को सुनवाई के समय केंद्र सरकार के वकील ने 26 व 27 सितंबर को दिए गए कोर्ट के आदेशों के क्रम में केंद्र से जानकारी लेकर जवाब पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की है।
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि चीन का लहसुन वर्ष 2014 से ही देश में प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, यह अब तस्करी के जरिए भारतीय बाजारों में पहुंच रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि चाइनीज लहसुन अवैध तरीके से बाजार में उतारा जा रहा है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारें लगाम लगाने में असमर्थ दिख रही हैं।
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