नई दिल्ली़, 29 अप्रैल (प्र)। जज शशांक नंदन भट्ट ने इस पुराने केस में कड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों अफसरों को 18 अप्रैल को दोषी ठहराया था। इन पर आईपीसी की धारा 323 और 448 के तहत केस चला। धारा 427 और 34 के तहत भी दोनों अफसर दोषी पाए गए। तीस हजारी कोर्ट ने वर्ष 2000 में हुए एक पुराने मामले में सीबीआई के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के रिटायर ऑफिसर वी.के. पांडे को सजा सुनाई है। यह मामला अक्टूबर 2000 में एक आईआरएस अधिकारी की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कथित कार्रवाई से संबंधित है। अदालत ने दोनों दोषियों को तीन महीने की सजा सुनाई है और साथ ही उन्हें जमानत भी दे दी है।
इससे पहले 18 अप्रैल को अदालत ने इस मामले में दोनों अधिकारियों को मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण के आरोपों में दोषी ठहराया था। यह पूरा मामला लगभग 26 साल पुराना है, जिसकी सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। सजा पर हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को उस समय 38 दिन तक जेल में रहना पड़ा था और इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से सिस्टम का दुरुपयोग किया गया था।
वकील ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता को न्याय पाने के लिए 26 साल तक इंतजार करना पड़ा, इसलिए अदालत को अधिकतम सजा और उचित मुआवजे पर विचार करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील ने दोषियों के लिए सजा में नरमी की मांग की। उन्होंने दलील दी कि दोनों अधिकारी अपनी निजी इच्छा से उस घटना में शामिल नहीं थे और उन्होंने किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण कार्रवाई नहीं की थी।
वकील ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा था और दोनों अधिकारियों ने लंबी विभागीय जांच और ट्रायल का सामना किया है। उन्होंने अदालत से अपील की कि सजा तय करते समय सभी परिस्थितियों पर दोबारा विचार किया जाए। लंबी बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन महीने की सजा और जमानत की अनुमति दी। यह मामला पिछले कई दशकों से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा था और अब इस पर अदालत का अंतिम निर्णय सामने आया है।
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