श्रीनगर, 14 जुलाई (ता)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गत दिवस कहा कि उन्हें कानूनी नोटिस के रूप में भारतीय जनता पार्टी से ‘प्रेम पत्र’ मिलने पर गर्व महसूस हो रहा है, क्योंकि इससे साबित होता है कि वह एक ऐसी राजनीतिक ताकत हैं, जिसे वे नजरअंदाज नहीं कर सकते।
भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने गत दिवस अब्दुल्ला को एक कानूनी नोटिस भेजा। यह नोटिस मुख्यमंत्री के उस दावे के बाद भेजा गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा ने उनकी सरकार गिराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को नकद और मंत्री पद का लालच देकर खरीदने की कोशिश की थी। अब्दुल्ला ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि मुझे एक वकील से पत्र मिला है, जो एक इलेक्ट्रॉनिक प्रति है। मैं इसे बहुत सम्मान की बात मानता हूं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में मैं अकेला ऐसा राजनेता हूं, जिसे भाजपा ने इस तरह का श्प्रेम पत्रश् भेजा है। मैं इसे सम्मान के प्रतीक के रूप में देखता हूं। जाहिर है मैं जम्मू-कश्मीर में एक ऐसी राजनीतिक ताकत हूं, जिसे वे नजरअंदाज नहीं कर सकते।
मुख्यमंत्री ने भाजपा की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस पर पूछे गए सवाल के जवाब में ये बातें कहीं। इस नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि अगर वह विधायकों को खरीदने के आरोपों को साबित नहीं कर पाते हैं या सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनपर 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा उनके बयान पर राजनीतिक जवाब देगी, क्योंकि उन्होंने एक राजनीतिक बयान दिया था; लेकिन उन्होंने कानूनी रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि यह भाजपा के लड़ने के तरीके को दिखाता है। वे राजनीतिक लड़ाइयों को अदालतों की आड़ में लड़ते हैं। मैं भी विधानसभा की आड़ लेकर यह बयान दे सकता था। मैं विधानसभा में मिले विशेषाधिकारों का फायदा उठाकर ऐसे बयान दे सकता था, जिन्हें विधानसभा के बाहर चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।
अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर के कई भाजपा नेताओं ने नेकां और उसके नेतृत्व पर अपमानजनक और मानहानिकारक आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से, एक नेता ने बार-बार हमारे खिलाफ बेबुनियाद और मानहानिकारक आरोप लगाए हैं, लेकिन हम उनका राजनीतिक रूप से मुकाबला करते रहे हैं। अब हम उस खास भाजपा नेता और कुछ अन्य लोगों को कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू करेंगे और देखते हैं कि यह प्रक्रिया कहां तक जाती है।
भाजपा की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ये आरोप दीवानी और आपराधिक दोनों कानूनों के तहत मानहानि के दायरे में आते हैं और इसमें मुख्यमंत्री से अपने आरोप लिखित रूप में वापस लेने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है, श्श्नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें। भाजपा के बारे में कोई भी और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से परहेज करें। ऐसा कोई भी बयान देने या दोहराने से बचें।
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