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    Home»देश»पुरूषों का क्लब बन गई है बार कौसिंल : सुप्रीम कोर्ट
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    पुरूषों का क्लब बन गई है बार कौसिंल : सुप्रीम कोर्ट

    adminBy adminAugust 5, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 05 जुलाई (ता)। राज्यों के बार काउंसिल में महिला वकीलों की भागीदारी काफी कम होने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। गत दिवस शीर्ष अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपने-अपने राज्य के बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को सह-नामित करने के निर्देश दिए। बेंच ने राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की बेहद कम भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि कई बार काउंसिलें अब ‘पुरुषों का क्लब’ बनकर रह गई हैं। अदालत ने कहा कि वकालत के पेशे में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
    सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस अवलोकन किया कि बार काउंसिल धीरे-धीरे पुरुषों के क्लब में बदल गई हैं और कहा कि उनके कार्यों पर एकाधिकार को समाप्त किया जाना चाहिए। साथ ही क्षेत्राधिकार के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को हर राज्य बार काउंसिल में दो सह-चयनित महिला सदस्यों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया।
    मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और वी.मोहन की एक बेंच ने बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआई) और राज्य बार काउंसिलों के चुनावों से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई के दौरान यह अवलोकन किया।
    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि बार काउंसिल पुरुषों के क्लब बन गए हैं। हम यह देख सकते हैं कि लोग इसे एकाधिकार की तरह लेते हैं। इसे पूरी तरह से समाप्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्राधिकार के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हर राज्य बार काउंसिल में दो सह-चयनित महिला सदस्यों की नियुक्ति करेंगे-एक पूर्व हाई कोर्ट न्यायाधीश और दूसरी एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता, जो बार में अच्छी स्थिति में हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सह-चयनित सदस्य ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जिनका चुनाव प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं हो, ताकि वे स्वतंत्र और तटस्थ सदस्यों के रूप में कार्य कर सकें।
    कोर्ट ने अवलोकन किया कि जहां तक सह-चयन का सवाल है। हमने हमेशा 10ः का ध्यान रखा है। सह-चयन उन लोगों का होना चाहिए जिनका चुनाव से कोई संबंध नहीं है।ष् कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य बार काउंसिल चुनाव में असफल महिला उम्मीदवार को सह-चयन के लिए विचार करने से अयोग्य नहीं माना जाएगा।

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