नई दिल्ली-वाशिंगटन, 08 जुलाई (ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गत दिवस बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्म से नागरिकता) और बर्थ टूरिज्म को टारगेट करते हुए दो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। उन्होंने कहा कि उनका एडमिनिस्ट्रेशन सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अमेरिकन इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल पर बहुत बड़ी कार्रवाई कर रहा है।
ओवल ऑफिस में रिपोर्टर्स से बात करते हुए ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई और कहा कि जन्मसिद्ध अधिकार (नागरिकता) के बारे में सुप्रीम कोर्ट में हमारा फैसला बहुत बुरा था। इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।श् उन्होंने आगे कहा कि हम बहुत बड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। इससे हमें इसे और ज़्यादा ज़ोरदार तरीके से करने का अधिकार मिलेगा। उन्होंने जन्मसिद्ध नागरिकता ले ली है, और उन्होंने इसका मजाक बना दिया है।
व्हाइट हाउस के अनुसार पहले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में विदेशी नागरिकों के बच्चों की कुछ कैटेगरी की पहचान की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा माने गए ऐतिहासिक अपवादों के मुताबिक, जन्म से नागरिकता के हकदार नहीं होंगे। एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा कि ये कैटेगरी पूरी नहीं हैं और ट्रंप बनाम बारबरा मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है।
दूसरा कार्यकारी आदेश राष्ट्रपति के प्राधिकारों को राज्य सचिव और होमलैंड सुरक्षा सचिव को सौंपता है और दोनों विभागों को जन्म पर्यटन की प्रथा को रोकने का निर्देश देता है। इसके तहत विदेशी नागरिक मुख्य रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका की यात्रा करते हैं ताकि उनके बच्चे को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त हो सके।
व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि एग्जीक्यूटिव एक्शन चौदहवें अमेंडमेंट के असली इरादे पर आधारित थे। मिलर ने कहा कि 14वां अमेंडमेंट खास तौर पर सिविल वॉर के बाद पास किया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक होंगे। इसके अलावा इसका कोई और मतलब और मकसद नहीं था।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद प्रेसिडेंट कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपनी अथॉरिटी का इस्तेमाल करके उन लोगों की कैटेगरी बढ़ा रहे हैं जो बर्थराइट सिटिजनशिप के लिए एलिजिबल नहीं हैं। मिलर ने कहा कि इसमें उदाहरण के लिए अमेरिका में एलियन दुश्मन, विदेशी टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन के मेंबर और बड़ी कैटेगरी के लोग शामिल हैं जो विदेशी सरकारों के लिए लॉबी करते हैं और काम करते हैं।
यह एक्शन लेने से यह पक्का होता है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग जो गलत तरीके से बर्थराइट सिटिजनशिप ले रहे थे, वे अब उन फायदों के लिए एलिजिबल नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि दूसरे ऑर्डर पर जोर देते हुए मिलर ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया। अमेरिकी इतिहास में पहली बार बर्थ टूरिज्म पर बैन लगाया गया है। दुनिया में किसी को भी इस धोखाधड़ी वाले मकसद के लिए वीजा लेने की इजाजत नहीं है। इससे अमेरिकी सिस्टम के सबसे बड़े गलत इस्तेमाल में से एक खत्म होता है और अमेरिकी नागरिकता पवित्र बनी रहती है।
व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने इन कदमों की कानूनी वैधता का बचाव करते हुए कहा कि हम जो दे रहे हैं कि वह कानूनी तौर पर मान्य तरीके अपनाना है जो साफ तौर पर हमारे पास है और उन्हें सीधे इस बर्थ टूरिज्म इंडस्ट्री पर टारगेट करना है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जो इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट की किसी भी राय के खिलाफ हो।
ये एग्जीक्यूटिव एक्शन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जून में दिए गए उस फैसले के कुछ हफ़्ते बाद आए हैं जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में उन माता-पिता के बच्चे जो देश में गैर-कानूनी या कुछ समय के लिए मौजूद हैं, वे चौदहवें अमेंडमेंट के सिटिजनशिप क्लॉज के तहत ऑटोमैटिक अमेरिकी सिटिजनशिप के हकदार हैं।
कोर्ट ने अमेरिका बनाम वोंग किम आर्क में अपने पहले के फैसले पर भी भरोसा किया, जिसमें इस बात की पुष्टि की गई थी कि अमेरिका में विदेशी माता-पिता के बच्चे जन्म से ही सिटिजनशिप के हकदार हैं।
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